suvichar
✕

कविता : तिल तिल तड़पती हूं

Written By WD
Updated: बुधवार, 28 दिसंबर 2016 (17:52 IST)
ममता भारद्वाज 
तिल-तिल तड़पती हूं 
चलने के बावजूद उस राह पर!
कदम कदम पर गिरती हूं
फिर भी संभलती हूं प्यारी सी दुनिया को पाने की चाह में!!

अपनों के अहंकार और अंधविश्वास पर 
खोकर अपना आस्तित्व फि‍क्र सभी की करती हूं 
बजाए सच्चाई के चलती हूं उस राह पर !
 
फिर भी ओ रूप दिखाई नहीं देती
जिसकी तलाश मैं करती हूं उस राह पर!
जिन आखों में ख्वाब थे कुछ पाने की
उनमें ही पीर का भार लिए चलती हूं बजाय सच्चाई के उस रह पर!
 
कसक है मन में जग के इस रीत से
क्यों कैद कर दिया मुझको सलाखों के बीच में
खुला है आसमां फिर भी उड़ नहीं सकती सच्चाई की राह पर!
 
बोझ लिए ताउम्र का लाख जतन करती हूं  
अनमोल रिश्तों को संवारने के 
फिर भी घिर जाती हूं अलग-अलग सोच और वि‍चारों की राह पर!
 
फिर भी अपनी सीमा बनाए रखती हूं
अपनी हस्ती बना लेने की
तब भी उन आखो में परित्याग और प्यार का अंश दिखाई नही देता उस राह पर!
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

World Sight Day: क्‍यों मनाते हैं विश्व दृष्टि दिवस? जानिए इसका महत्‍व और इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

अगला लेख