ramcharitmanas
✕

कविता : मां बहुत याद आती है...

Written By WD
Published: गुरुवार, 5 मई 2016 (17:21 IST)
समीर सरताज 
 
कुछ है, कचोटता-सा भीतर
चोट से भी ज्यादा चोटता-सा
नोचता हुआ कोई दर्द जमाने का
बेवजह ही कोई बात जब रुला जाती है,
ऐसे में, मां बहुत याद आती है
 
मेरी ठोकर की मिट्टी, सिर्फ वो ही
बेगरज मेरे घुटनों से हटाती थी
जमीं से उठाती थी
मैं जब तक फिर से चलने ना लगूं,
मेरे कंधे को वो हाथ लगाती थी
वो थकन रातभर फिर से थकाती है,
ऐसे में, मां बहुत याद आती है
 
वो दूर से ही, मेरे हारे हुए कदमों को
भांप जाती थी
भरी आंखें देख मेरी, उसकी रूह कांप जाती थी
झट से आंचल के कोने में
वो बूंदों को बांध लेती
अनकहे ही वो मुझको, आंसुओं का मोल समझाती थी
बेमोल मोतियों की लड़ी, जब भी आंखों से टपक जाती है,
ऐसे में मां,
तू बहुत-बहुत याद आती है...
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख