suvichar
✕

नई कविता : धड़कन हो तुम

Updated: सोमवार, 24 जुलाई 2017 (17:33 IST)
- देवेंन्द्र सोनी
धड़कन हो तुम
रुक ही गई थी धड़कन 
जब इकलौते पुत्र ने
अपनी शादी के 
दो वर्ष बाद ही 
बूढ़े हो चुके पिता से कहा था -
अब नहीं रह सकता 
मैं तुम्हारे साथ ।
 
तंग आ गया हूं रोज-रोज की
हिदायतों और टोका-टाकी से
बदल चुका है जमाना और
बदल गई हैं मान्यताएं ।
 
जोर से बोला था बेटा -
मेरी और तुम्हारी प्राथमिकताओं में
जमीन आसमान का फर्क है। 
मानता हूं, 
आप रहे होंगे तंगहाली में
काट कर पेट अपना 
संवारा है जीवन मेरा, पर
यही तो सब कुछ नहीं ।
 
मुझे भी देखना है अब 
अपना और बड़ी होती बेटी का भविष्य
पत्नी के भी मेरी 
करना है सपने पूरे ।
 
साथ रहकर कुछ बचता नहीं है
इतनी दवाओं का खर्च पचता नहीं है।
ऊपर से रोज-रोज आपके 
मेहमानों का आना-जाना 
जरा भी नहीं भाता है
उनकी जली-कटी बातों से
मन अवसाद से घिर जाता है।
 
अलग रहेंगे तो नहीं होगा
रोज-रोज का विवाद
मिल जाएगी आपको 
मुफ्त ही सरकारी दवाएं 
मिल जाएंगी और भी वे अन्य सुविधाएं
जो नहीं लेते हो आप 
मेरे ओहदे की वजह से।
 
सुनकर बेटे की ये दलील
सैलाव सा उतर आया आंखों में
पर जज्ब कर अपने आंसुओं को
धीरे से बोले पिता - सोच ले बेटा !
 
मैं तो जी लूंगा जैसे-तैसे, पर -
धड़कन है तू इस दिल की
जाते ही तेरे यह भी चली जाएगी
लाख करेगा जतन फिर वापस न आएगी।
 
कहता हूं - ऐसे बेटों से 
जो छोड़कर माता-पिता को 
रहना चाहते हैं अलग 
स्वतंत्रता तो मिल जाएगी तुम्हें
खर्चे से भी बचा जाओगे, पर
खोकर वह दिल जिसमें -
धड़कते हो तुम सदा ही 
धड़कन बनकर।
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख