Hanuman Chalisa
✕

मैं और मेरी मां :मां, तुम जो रंगोली दहलीज पर बनाती हो

Updated: बुधवार, 4 अगस्त 2021 (09:54 IST)
स्मृति आदित्य
 
मां 
तुम जो रंगोली दहलीज पर बनाती हो 
उसके रंग मेरी उपलब्धियों में चमकते हैं 
तुम जो समिधा सुबह के हवन में डालती हो 
उसकी सुगंध मेरे जीवन में महकती है 
तुम जो मंत्र पढ़ती हो वे सब के सब 
मेरे मंदिर में गुंजते हैं 
तुम जो ढेर सारी चूडियां 
अपनी गोरी कलाई में पहनती हो 
वे यहां मेरे सांवले हाथों में खनकती है ...
 
मां 
तुम्हारे भाल पर सजी गोल बिंदिया 
मेरे कपाल पर रोज दमकती है 
तुम्हारे मुख से झरी कहावतें 
अनजाने ही मेरे होंठों पर थिरक उठती है 
लेकिन मां 
मैं तुम जैसी कभी नहीं बन सकी 
तुम जैसा उजला रंग भी मैंने नहीं पाया 
 
लेकिन तुम 
मेरे विचार और संस्कार में 
खामोशी से झांकती हो 
क्योंकि तुमसे जुड़ी है मेरी पहचान 
यह मैं जानती हूं, यह तुम जानती हो.....  
 
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

फ्रांस में हिंसक छात्र प्रदर्शन, हर तीन में से एक स्कूल प्रभावित

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: यदि दयालुता हमारा स्वभाव है, तो हिंसा कहाँ से आती है?

वरिष्ठ अधिकारी चक्रपाणि दत्त मिश्र की पुस्तक 'कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899' का गौरवमयी विमोचन

फेमिनिस्‍ट औरतों को एक तख़्ती पर मर्दों के लिए यह भी लिखना चाहिए

रानी दुर्गावती जयंती 2026: स्वाभिमान के लिए सीने में घोंप ली थी कटार, जानें गोंडवाना की महान महारानी के अमर बलिदान की कहानी

अगला लेख