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कविता : इस होली में...

कविता
उत्तर पूर्व में बी.जे.पी हुई मज़बूत ,इस होली में। 
उजागर हुई नीरव-चौकसी की काली करतूत, इस होली में ।।
ऐसी खेली सी.बी.आई. ने लट्ठमार होली,
धुल गया पी.चिदम्बरम का पूत,इस होली में ।।1।।
 
केजरीवाल के ढीठ गुर्गों का मिटा गुमान,इस होली में। 
उपचुनाव ही लड़ने तक कांग्रेस का सिमटा अरमान,इस होली में ।।
उधर आतंकवाद की ग्रे-लिस्ट में शामिल किये जाने पर ,
बेचैन / रुआंसा है पाकिस्तान ,इस होली में ।।2 ।।
 
पी.एन.बी. के हादसे से बैंकों की विश्वसनीयता हुई धूल,इस होली में। 
गीतांजली में फँसा पैसा हुआ बेवसूल,इस होली में ।।
इस घोटाले का लांछन अमिट होगा इस सरकार पर,
सारे ज्ञानी भी कर रहे हैं कुबूल, इस होली में ।। 3 ।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें