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नौजवान दिलों के शायर थे साहिर : जावेद अख्तर

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 11 नवंबर 2016 (17:34 IST)
• साहिर समग्र : साहिर लुधियानवी का रचना–संसार का लोकापर्ण 
• यह किताब राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है 
 
भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार और शायर साहिर लुधियानवी की किताब 'साहिर समग्र : साहिर लुधियानवी का रचना–संसार’ का लोकपर्ण देश के मशहूर शायर,  गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने आज ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में किया तथा शायर नोमान शौक ने जावेद अख्तर के साथ साहिर समग्र' किताब पर बातचीत की। किताब में संकलि‍त साहिर के नज्मों और गीतों का संकलन व लिप्यांतरण आशा प्रभात ने किया है। इस अवसर पर राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी भी मौजूद थे।
 
यह किताब साहिर की संपूर्ण रचनाओं का समग्र है, अभी तक उपलब्ध उनकी तमाम गजलों, नज्मों और गीतों को इसमें इकठ्ठा करने की कोशिश की गई है। 
 
साहिर फिल्मों में आने से पहले ही, अपने समय के लोकप्रिय शायरों में शुमार हो चुके थे। ऐसी कई नज्में और गजलें है, और गीत भी, जिनमें उन्होंने समाज की आलोचना दो-टूक लहजे में की है। प्रगतिशील आंदोलन से जुड़े साहिर के गीतों में उस समय का समाज साफ झलकता है। उन्होंने अपने गीतों के जरिए भारतीय सिनेमा को ऐसा उपहार दिया है जो उसके इतिहास में मील का पत्थर है। 
 
फि‍ल्मों ने उन्हें रोजगार दिया जिससे उन्होंने समाज के जवाब में फिल्मों को कुछ ऐसे अमर उपहार दिए, जिन्हें उन्होंने अपने ऊबड़-खाबड़ और गहरी उदासी में बीते जीवन में कमाया था। एक ऐसे परिवार में पैदा होकर, जिसका शायरी और अदब से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था, और एक ऐसे पिता का पुत्र होकर जिसके साथ उनके संबंध कभी पिता-पुत्र जैसे नहीं रहे और एक ऐसे समाज में जीकर, जिसका सस्तापन, नाइंसाफी और संकीर्णताएं उनकी उदास आंखों से बचकर निकल नहीं पाती थीं, उन्होंने वह कमाया जिसे भले ही उस वक्त के आलोचकों ने बहुत मान नहीं दिया, लेकिन जो आम आदमी की यादों में हमेशा के लिए पैठ गया। 
 
किताब लोकापर्ण अवसर पर जावेद अख्तर ने कहा कि " दुनिया में बहुत से शायर हुए मगर साहिर लुधियानवी का आकर्षण सबसे अलग था, उनकी हर कविता में कोई बात अनोखी होती थी जिसे आम आदमी अपनी जिंदगी से जोड़ सकता है।"
 
इस अवसर पर जावेद अख्तर ने अपनी पुस्तक लावा के कुछ अंश भी पढ़े, यह पुस्तक भी राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। 
 
राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी ने इस अवसर पर कहा कि "साहिर लुधियानवी का नाम आते ही दो बातें जहन में आती है एक तो उनके हरदिल अजीज गाने और अमृता प्रीतम। इसमें उनकी अजीम शायरी कहीं पीछे छूट जाती है। उनकी सभी शायरी और फि‍ल्मी गीतों को पहली बार इस पुस्तक में एक साथ पेश किया जा रहा है।"
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