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मानवता और भेदभाव को बेहद संवेदनशील थे अटल बिहारी वाजपेयी, पढ़ें 6 चर्चित विचार

Updated: गुरुवार, 16 अगस्त 2018 (19:30 IST)
अटल बिहारी वाजपेयी, मानवता को सबसे ऊपर मानकर चलते थे। न उन्होंने कभी इंसानों में भेद किया न धर्म में और न ही उनकी जाति में। वे हमेशा से ही मानवता और उसकी गुणवत्ता में सुधार के पक्षधर रहे हैं  - 
 
1  अगर परमात्मा भी आ जाए और कहे कि छुआछूत मानो, तो मैं ऐसे परमात्मा को भी मानने को तैयार नहीं हूं किंतु परमात्मा ऐसा कह ही नहीं सकता ।  -अटल बिहारी वाजपेयी
 
2  अस्पृश्यता कानून के विरुद्ध ही नहीं, वह परमात्मा तथा मानवता के विरुद्ध भी एक गंभीर अपराध है ।
- अटल बिहारी वाजपेयी
 
3  इंसान बनो, केवल नाम से नहीं, रूप से नहीं, शक्ल से नहीं, हृदय से, बुद्धि से, सरकार से, ज्ञान से ।- अटल बिहारी वाजपेयी
 
4  मनुष्य जीवन अनमोल निधि है, पुण्य का प्रसाद है । हम केवल अपने लिए न जिएं, औरों के लिए भी जिएं । जीवन जीना एक कला है, एक विज्ञान है । दोनों का समन्वय आवश्यक है । -अटल बिहारी वाजपेयी
 
5 मुझे अपने हिन्दूत्व पर अभिमान है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्तिम-विरोधी हूं । - अटल बिहारी वाजपेयी
 
6  दरिद्रता का सर्वथा उन्मूलन कर हमें प्रत्येक व्यक्ति से उसकी क्षमता के अनुसार कार्य लेना चाहिए और उसकी आवश्यकता के अनुसार उसे देना चाहिए । -अटल बिहारी वाजपेयी

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