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शर्तिया हंसी नहीं रुकेगी इस लाजवाब जोक को पढ़कर : पैसे वसूली का नया स्टाइल

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 21 जून 2024 (17:07 IST)
एक बार चिंटू इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के ऑफिस के बाहर केले बेच रहा था।
 
इलेक्ट्रिसिटी विभाग के एक बड़े अधिकारी न पूछा : केले कैसे दिए ? 
 
चिंटू : केले किस लिए खरीद रहे हैं साहब ?
 
अधिकारी : मतलब ??
 
चिंटू : मतलब ये साहब कि,
 
-  केले यदि मंदिर के प्रसाद के लिए ले रहे हैं तो 10 रुपए दर्जन।
- वृद्धाश्रम में केले देने हों तो 15 रुपए दर्जन।
- बच्चों के टिफिन में रखने हों तो 20 रुपए दर्जन।
- केले घर में खाने के लिए ले जा रहे हों तो, 25 रुपए दर्जन
- और अगर पिकनिक के लिए खरीद रहे हों तो 30 रुपए दर्जन।
.... 
.... 
 
अधिकारी : ये क्या बेवकूफी है? 
अरे भई, जब सारे केले एक जैसे ही हैं तो, 
भाव अलग अलग क्यों बता रहे हो ??
.... 
चिंटू : ये तो पैसे वसूली का, 
आप ही का स्टाइल है साहब, 
मैं तो सिर्फ इस पर अमल कर रहा हूं।
.... 
.... 
चिंटू आगे बोला : 
- 1 से 100 रीडिंग का रेट अलग, 
- 100 से 200 का अलग, 
- 200 से 300 का अलग। 
अरे आपके पापा की बिजली है क्या ?
आप भी तो एक ही खंभे से बिजली देते हो।
- तो फिर घर के लिए अलग रेट, 
- दुकान के लिए अलग रेट, 
- कारखाने के लिए अलग रेट...  
.... 
.... 
अब तो अधिकारी का चेहरा ग़ुस्से में तमतमा उठा, 
वो बोल : रख लें अपने केले अपने पास, 
मैं तो ये चला....  

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