4 अक्टूबर : राष्ट्रीय अखंडता दिवस विशेष

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किसी भी सभ्य और लोकतान्त्रिक राष्ट्र की आधारशिला यह है कि वह अपने नागरिकों में लिंग,धर्म,जाति,आर्थिक स्थिति आदि के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सबके साथ समान व्यवहार करें। वास्तव में राज्य द्वारा नागरिकों से समान व्यवहार की यह प्रक्रिया समाज में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन तार्किक सामाजिक मूल्यों की स्थापना करती है,जो किसी भी राष्ट्र के जीवन और विकास की आधारभूत आवश्यकता होती है।


परंतु जब समान व्यवहार की यह प्रक्रिया समाज के रूढ़िवादी विचारों,धार्मिक कट्टरता,व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों से बाधित होती है तो इसकी परिणति एक शोषणकारी व्यवस्था के सृजन के रूप में होती है। तब इस शोषण के लिए जिम्मेदार न सिर्फ स्वार्थपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक मूल्य होते हैं बल्कि राज्य भी इस शोषण का संरक्षक बन जाता है।
दरअसल,किसी भी चीज को मुद्दा बनाकर अगर समाज में हिंसा फैलाई जाती है तो इसका राष्ट्रीय एकता पर बुरा असर पड़ना तय है। एक तो हमारे समाज में काफी विविधताएं पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में अगर एक खास वर्ग अपनी चीजों को सर्वोत्तम कहने लगे और उसे दूसरे लोगों को अपनाने के लिए मजबूर करने के लिए हिंसा का सहारा लें तो राष्ट्र की एकता और अखंडता को चोट पहुंचना तय है।

आज एक बड़ा प्रश्न यह है कि धर्म,जाति,भाषा,क्षेत्र आदि के नाम पर समाज को बंटने से कैसे रोका जाए? इसके लिए सबसे पहले तो हमें एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान करना सीखना होगा। परिवार में अलग राय रखने वाले को घर से निकाल नहीं दिया जाता है। यह सही है कि लोग अपनी क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा दें। इससे सांस्कृतिक समृद्धि बढ़ेगी। लेकिन यह राष्ट्रीयता की कीमत पर नहीं होना चाहिए।’
हमारे देश में सभी धर्मों के लोग जानते हैं कि उनकी संस्कृति एक है। बौद्ध हों या जैन हों,वैष्णव हों या सिक्ख या फिर ब्रह्यसमाजी, सभी मानते हैं कि उनके पूर्वज एक थे। भले ही बाद में उनके पूर्वजों के जीवन कथा को अलग-अलग मजहब का रंग दे दिया गया?

सबको जोड़ने के लिए ही तीन रंगों के कपड़े को जोड़कर 'तिरंगा'बनाया गया है। वह कोई साधारण कपड़ा नहीं है बल्कि उसे हमने 'राष्ट्रीय एकता' का प्रतीक माना है। इसकी प्रतिष्ठा राष्ट्र की प्रतिष्ठा और इसका अपमान राष्ट्र का अपमान है। इसीलिए इस तिरंगे की शान के लिए आज तक हजारों-लाखों भारतीय अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। इसी बलिदान का परिणाम है कि आज हमारी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक तिरंगा झंडा अपने सर्वोच्च स्थान पर गर्व के साथ फहरा रहा है। हमें अपने देश की एकता व अखंडता पर गर्व है।

 

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