Hindi Diwas 2025: हिंदी भाषा का गुणगान करती इस कविता को सुनाकर खूब मिलेगी तारीफ
Poem on Hindi Diwas:
आज विरासत ढूंढें वारिस
धड़कन ढूंढें दिल को आज
मौन शब्द भी मुखर होकर
खोज रहे अपनी आवाज़
क्यों देखें किसी और को
हम ख़ुद से ही शुरुआत करें
आइये हम हिंदी में बात करें
भाषा सिर्फ ज़रिया नहीं
भाषा एक परिपाटी है
सभ्यता को ज़िंदा रखती
ये वो उपजाऊ माटी है
जड़ों को अपनी सींचे हम
मज़बूत अपनी बुनियाद करें
आइये हम हिंदी में बात करें हिंदी पढ़ें - हिंदी लिखें
अभिव्यक्ति का मौलिक स्वाद चखें
फेसबुक, इंस्टा, ट्विटर हर जगह
अपनी भाषा में अपनी बात रखें
अपनी वाणी का विस्तार
सुबह दोपहर रात करें
आइये हम हिंदी में बात करें
फिर बातों में गर्माहट हो
संवाद में अपनेपन का स्वाद खिले
दिल में ऐसी ठंडक पहुंचे
जैसे अपना कोई गले मिले
अपनी ज़बान में बोलें हम
ज़ाहिर अपने जज़्बात करें
आइये हम हिंदी में बात करें
तुमको मुझसे, मुझको तुमसे
जिसने आज मिलवाया है
भाषा का विशाल वृक्ष है
सुन्दर शब्दों की छाया है
यूँ ही चले ये सिलसिला
हम आगे भी मुलाक़ात करें
आइये हम हिंदी में बात करें
- गरिमा मुद्गल