फेफड़ों के कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन जीन्स
जब भी स्मोकिंग छोड़ने की बात आती है तो लोग किसी दूसरे व्यक्ति का हवाला देते हुए कहते हैं कि उसने तो पूरी जिंदगी सिगरेट, बीड़ी का पान किया लेकिन उसे तो कुछ नहीं हुआ तो मुझे कैसे कुछ हो सकता है।
ये बात पते की भी है कि जब धूम्रपान से कैंसर होने का खतरा होता है तो कई लोग इससे प्रभावित क्यों नहीं होते। इस सवाल का जवाब शोधकर्ताओं ने ढूंढ निकाला है।
शोधकर्ताओं ने अपने शोध के लिए 50 हजार लोगों पर परीक्षण किया। इस दौरान जो उन्होंने देखा वह चौंकानेवाला था। उन्होंने पाया कि कुछ लोगों के डीएनए में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो उनके फेफड़ों को धूम्रपान के खतरनाक प्रभाव से एक मास्क की तरह बचाता है।
इस दौरान उन्होंने क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल मोनरी डिसीज(सीओपीडी) पर गौर फरमाया। सीओपीडी की वजह से ही व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, कफ आना, छाती में इन्फेक्शन जैसी समस्याएं होती हैं।
जब उन्होंने धूम्रपान करने वालों, धूम्रपान न करने वालों तथा उन लोगों का आकलन किया जो इन रोगों से जूझ रहे हैं व रोगों से नहीं जूझ रहे हैं। तो उन्होंने पाया कुछ लोगों का डीएनए ऐसा है जो उन्हें सीओपीडी के खतरों से बचाता है। इसलिए जिन धूम्रपान करने वालों का जीन्स अच्छा होता है उनके सीओपीडी से ग्रस्त होने की आशंकाएं कम होती हैं। वहीं खराब जीन्स वाले इससे जल्दी ग्रस्त होते हैं।
