सांप के काटने से मौत अब होगी कम! गुजरात के धरमपुर में खुला पहला स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट
गुजरात सरकार की विशेष योजना, धरमपुर में बना देश का आधुनिक 'स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट'
Dharampur Snake Research Institute : गुजरात सरकार ने सांप के काटने से होने वाली मृत्यु दर को रोकने के लिए एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर में राज्य का पहला स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट (SRI) शुरू किया गया है। यह संस्थान स्थानीय जहरीले सांपों के जहर से एंटीवेनम (जहर-नाशक दवा) तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्थानीय एंटीवेनम क्यों है जरूरी?
संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. डी.सी. पटेल के अनुसार, सांप के जहर का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है। दूसरे राज्यों या दूर-दराज के क्षेत्रों के सांपों के जहर से बना एंटीवेनम अक्सर स्थानीय मरीजों पर कम प्रभावी होता है। इस समस्या के समाधान के लिए अब गुजरात के ही सांपों से जहर इकट्ठा कर एंटीवेनम बनाया जाएगा, जिससे सटीक उपचार संभव हो सकेगा।
धरमपुर के इस संस्थान में सांपों की देखभाल और जहर निकालने की पूरी प्रक्रिया विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्धारित प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाती है। आधुनिक तकनीक की मदद से सांप के जहर को प्रोसेस कर उसे पाउडर (Lyophilized) के रूप में बदला जाता है। इसके बाद, इस उच्च गुणवत्ता वाले पाउडर की ई-नीलामी लाइसेंस प्राप्त एंटीवेनम निर्माताओं को की जाती है, जिनसे सरकार दवा खरीदकर राज्य के विभिन्न अस्पतालों में आवश्यकतानुसार आपूर्ति करेगी।
इस शोध केंद्र में मुख्य रूप से गुजरात की चार सबसे जहरीली प्रजातियों - इंडियन कोबरा (नाग), कॉमन क्रेट (कालोतरो), रसेल्स वाइपर (खडचितरो) और सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसो) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गुजरात के ही सांपों से एकत्रित जहर से बना एंटीवेनम स्थानीय सर्पदंश के मामलों में अत्यंत प्रभावी साबित होगा, जिससे राज्य में मृत्यु दर में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
नीलामी में मिली ऊंची कीमत
हाल ही में हुई ई-नीलामी में गुजरात के सांपों के जहर की गुणवत्ता इतनी बेहतर पाई गई कि कोबरा का जहर रु॰44,000 प्रति ग्राम और फुरसो का जहर 56,500 रुपए प्रति ग्राम जैसी ऊंची कीमतों पर बिका।
धरमपुर के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. डी.सी. पटेल, जो पिछले 35 वर्षों से 98% सफलता दर के साथ सर्पदंश का इलाज कर रहे हैं, उनका मानना है कि यह संस्थान राज्य के लिए वरदान साबित होगा। यह संस्थान गांधीनगर स्थित गुजरात फॉरेस्ट्री रिसर्च फाउंडेशन (GFRF) के तहत कार्यरत है। सरकार की इस पहल से न केवल इलाज सस्ता होगा, बल्कि कीमती जान बचाने में भी बड़ी सफलता मिलेगी।