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Fathers Day : पिता के लिए क्या लिखूं, उनकी ही लिखावट हूं मैं...

शनिवार,जून 20, 2020
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बड़ी ही अजीब सी थी बाबूजी की साइकिल। मैं तो उसे हमेशा अंग्रेजों के ज़माने की ही कहा करती थी। भले ही हमने उसी से जैसे तैसे चढ़-चढ़ा के साइकिल चलाना सीखा है। आम साइकिलों से थोड़ी बड़ी
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पिता ईश्‍वर की तरफ से भेंट की हुई अनमोल रचना है। पिता के बिना हम जीवन जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते। आइए जानें पितृ दिवस के अवसर पर पिता के बारे में 15 अमूल्य विचार-
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पुराणों में इन 5 को कहा गया है पिता- जन्मदाता, उपनयन करने वाला, विद्या देने वाला, अन्नदाता और भयत्राता
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तुम खुश हो ना अपने पति के साथ.. यकीन मानो अब मैं भी वैसा नहीं रहा पर कभी-कभी बहुत याद आती हो तुम कि मैं तुम्हें ना जाने किस डर से कभी प्यार नहीं कर पाया.. वैसा जैसा बचपन में किया करता था... हो सके तो इस खत को पढ़कर ''फादर्स डे'' पर घर आना मैं अच्छा ...
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बच्चे का अपने माता-पिता से सबसे गहरा नाता होता है। मां से भावनाओं का जुड़ाव, तो पिता से समझ का। मां की ममता और करुणाशीलता तो जगजाहिर है, लेकिन कई बार पिता की अनकहे शब्द और जता न पाने की आदत उनके भावों को ठीक तरह से अभिव्यक्त नहीं कर पाती और हम पिता ...
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पिताजी का सबसे महत्वपूर्ण गुण है, कि वे सदैव हर समय धीरज से काम लेते हैं और कभी खुद पर से आपा नहीं खोते। हर परिस्थिति में वे शांति से सोच समझ कर आगे बढ़ते हैं
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न शिकवों की शिकन, न शिकायतों का आडंबर, दुनिया के इस बीहड़ वन में मेरे लिए पगडंडी बनाते हैं
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परिवार को जो हर हाल में संभालता है, हर परिस्थिति में हर बात का हल निकालता है, न कोई इच्छा न कोई जरूरत रहती अधूरी
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पिता की इस श्रेणी में वे सभी पिता शामिल हैं, जो हर कार्य में बच्चों का उत्साह और हौंसला बढ़ाते रहते हैं। अगर आपने कुछ गलती कर दी या फिर आप आप खुश नहीं है, त
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फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं। आइए जानें कब, कहां और कैसे हुई फादर्स डे की शुरुआत...
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फादर्स डे भले ही वर्तमान में अस्तित्व में आया हो, लेकिन पिता और संतान का संबंध और उसके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन हमारे शास्त्रों में सदियों से निहित है।
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poem on father - पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी, आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी
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माना कि मौन रहकर सागर समाहित कर लेता है स्वयं में उसकी ओर आने वाली हर नदी को पर नदियों ने समझा है कभी दर्द सागर का?
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