राहे खुदा में खर्च करें ईमान
परलोक पर ईमान लाएँ और राहे खुदा में खर्च करें
रमजान माह में तरावीह की नमाज रात में अदा की जाती है। इस नमाज में हाफिजे कुरआन (जिसे कुरआन कंठस्थ याद होता है) आवाज के साथ कुरआन की आयतें पढ़ते हैं। पहली तरावीह गुरुवार को अदा की गई। इसमें कुरआन के सवा पारे (भाग) की तिलावत (कुरआन पढ़ना) की गई। सुरः फातिहा और सुरः बकरा की 176 आयतें (वाक्य) पढ़ी गईं। यह सबसे पहले अवतरित हुई थीं। इसमें बंदा अल्ला से दुआ करता है कि उसे हिदायत अता करे। कुरआन के इस भाग में गैब पर ईमान लाने और नमाज कायम करने के बारे में बताया गया है। परलोक पर ईमान रखें और अल्लाह के दिए भोजन में से दान करें। दोजख (नरक) से डरें और जन्नात (स्वर्ग) की खुशखबरी भी दी गई है। आदम (अ.) की पैदाइश और शैतान के इंकार का भी इसी भाग में जिक्र है। इसी पारे में हजरत मूसा और पैगम्बर इब्राहीम और काबे के निर्माण के बारे में भी बताया गया है। काबे की तरफ रुख कर नमाज पढ़ने और नमाज, जकात, हज और कुर्बानी का भी इसी भाग मेंजिक्र किया गया। दूसरी तरावीह : आज की तरावीह की नमाज में दूसरे से तीसरे पारे के मध्य भाग तक तिलावत की जाएगी। इसमें इस्लामी दावत, अल्लाह के अधिकार, इबादत, जीवन व्यवस्था और सामाजिक शिक्षा का सार दिया गया है। दान, शादी, तलाक, वसीयत, लेन-देन और कर्ज के बारे में भी हिदायत दी गई है। ब्याज खोरी, शराबनोशी और हराम-हलाल (वैध-अवैध) का जिक्र करते हुए आदेश दिया गया है कि अपने माल में से माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों, मुसाफिरों, बेसहारों और गुलामों की भी मदद करें। ब्याज का लेन बिलकुल न करें। माताएँ बच्चों को खुद काया गैर औरत का दूध दो साल तक पिलाएँ। इसी आयत में कुरआन को गौर से पढ़ने और समझने पर भी जोर दिया गया है। कुरआन इसलिए भेजा गया कि इसमें झूठ और सच का फर्क स्पष्ट समझाया गया है। मुसीबत में ईमान वाले सब्र करें, इबादत करें और अल्लाह की राह में खर्च करें।