शुक्रवार, 27 मार्च 2026
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  4. Do a surgical strike on the corrupt people of Bhagirathpura

इंदौर में भी चलाओ ऑपरेशन सिंदूर, भागीरथपुरा के भ्रष्टाचारियों पर करो सर्जिकल स्ट्राइक

Indore water
हुक्मरानों की रस्साकशी में बस्ती उजड़ गई, प्यास बुझाने चले थे, यहाँ तो हस्ती ही उजड़ गई।

पहलगाम के कातिलों की तरह, भागीरथपुरा के जघन्य कांड के ज़िम्मेदारों को भी मिट्टी में मिलाने का वक्त आ गया है। जब सरहद पार से आए कातिल हमारी खुशियों को उजाड़ते हैं, तो देश की आत्मा कांप उठती है और हम 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे अभियानों से उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचाते हैं। लेकिन उस 'आतंक' का क्या, जो हमारे ही सिस्टम के भीतर सफेदपोशों और लापरवाह अफसरों के रूप में पनप रहा है? इंदौर के भागीरथपुरा में जो हुआ, वह कोई दैवीय आपदा नहीं थी; वह एक प्रशासनिक नरसंहार था।

आज समय आ गया है कि हम सीमा के दुश्मनों की तरह, व्यवस्था के इन 'दीमकों' पर भी एक निर्णायक सर्जिकल स्ट्राइक करें।

जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं : भागीरथपुरा की गलियों में बिछी मातम की चादर चीख-चीखकर पूछ रही है कि आखिर 10 साल की मन्नत के बाद आए उस छह महीने के मासूम का क्या कसूर था? उन सुहागनों और बुजुर्गों का क्या दोष था, जिन्होंने सरकार पर भरोसा करके नगर निगम के नल का पानी पिया?

पहलगाम के कातिलों को सजा दिलाने के लिए जिस तरह पूरी ताकत झोंक दी गई थी, वैसी ही इच्छाशक्ति इंदौर में क्यों नहीं दिखती? क्या इसलिए कि यहाँ कातिल कोई विदेशी घुसपैठिया नहीं, बल्कि वह भ्रष्टाचार है जिसने पानी की पाइपलाइन और ड्रेनेज की लाइन को एक कर दिया?

'फोकट' की राजनीति और घड़ियाली आंसू: त्रासदी के बाद जनप्रतिनिधियों का आना और "हम इसकी जांच कराएंगे" जैसे घिसे-पिटे जुमले उछालना अब जनता को बर्दाश्त नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि नेता अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ते हैं और अधिकारी बजट या तकनीकी खामियों का रोना रोते हैं। यह 'कागजी फुटबॉल' का खेल बंद होना चाहिए।

हमें एक ऐसी 'सर्जिकल स्ट्राइक' की जरूरत है जो:
  • उन ठेकेदारों की संपत्ति कुर्क करे जिन्होंने घटिया पाइपलाइन बिछाई।
  • उन इंजीनियरों को सलाखों के पीछे भेजे जिन्होंने बिना जांच के सप्लाई चालू रखी।
  • उन जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करे जो वोट मांगने तो आते हैं, लेकिन शिकायतों के वक्त गायब हो जाते हैं।
भागीरथपुरा को इंसाफ, फाइलों से नहीं कार्रवाई से मिलेगा : प्रशासन अक्सर जांच के नाम पर समय काटता है ताकि जनता का गुस्सा शांत हो जाए। लेकिन इस बार मामला 'ठंडे बस्ते' में जाने लायक नहीं है। यह जघन्य कांड है। यदि हम पहलगाम के शहीदों के लिए खून खौलाते हैं, तो भागीरथपुरा के इन 'बेगुनाह शहीदों' के लिए हमारी संवेदनाएं ठंडी क्यों पड़ जाती हैं?

ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर इंदौर में भी एक विशेष अभियान शुरू होना चाहिए— 'ऑपरेशन जवाबदेही' अगली बार जब कोई अफसर या नेता कुर्सी पर बैठे, तो उसके मन में यह खौफ होना चाहिए कि यदि उसकी लापरवाही से एक भी जान गई, तो उसका करियर और सम्मान दोनों खाक हो जाएंगे।

शहरों को 'स्मार्ट' बनाने का ढोंग तब तक बेमानी है, जब तक हम अपने नागरिकों को ज़हर-मुक्त पानी नहीं दे सकते। इंदौर को नंबर-1 का तमगा साफ-सफाई के लिए मिला है, लेकिन अब वक्त है  कि इंदौर 'न्याय' और 'जवाबदेही' में भी नंबर-1 बने।

भागीरथपुरा के गुनहगारों पर ऐसी कार्रवाई हो कि वह नजीर बन जाए। यह सर्जिकल स्ट्राइक किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस 'सिस्टम' के खिलाफ होनी चाहिए जो इंसानी जान की कीमत चंद रुपयों के मुआवजे से आंकता है।

इंसाफ में देरी, खुद में एक अपराध है। "जो न्याय के लिए नहीं लड़ते, वक्त उन्हें बुजदिलों की श्रेणी में डाल देता है। भागीरथपुरा का मातम आज हर इंदौरवासी से जवाब मांग रहा है। खामोश रहकर अपनी नस्लों को कायरता विरासत में मत दीजिए। आवाज बुलंद करो! वरना आज की यह चुप्पी कल आपके खुद के घर का चिराग बुझाने की वजह बनेगी।
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