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शब्दों की महत्ता और शब्द उल्लास का आरंभ: वेबदुनिया के 23 साल पूरे होने पर अनूठी प्रस्तुति

शुक्रवार,सितम्बर 23, 2022
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‘Change Is Constant’ सिर्फ यह एक पंक्‍ति हमारे पूरे जीवन को परिभाषि‍त करती है। यह पंक्‍ति जीवन का सूत्र है। अगर कहीं जिंदगी उलझ जाए, लड़खड़ा जाए तो यही याद रखि‍ए ‘Change Is Constant’ अर्थात बदलाव ही शाश्वत है, अपरिहार्य है, स्‍थि‍र है। बदलाव ही गति ...
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आज यानी 23 सितंबर, 2021 को वेबदुनिया ने अपनी यात्रा के 22 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। वेबदुनिया, हमारी वेबदुनिया से पहले आपकी वेबदुनिया, सजग और सुयोग्य पाठकों की वेबदुनिया... आज आपके ही प्यार, विश्वास और सम्मान ने हमें यह दिवस मनाने का सुअवसर दिया है।
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डॉक्टर्स डे, 1 जुलाई 2021 को जब हम यह दिन मना रहे हैं तो हमें याद आता है महामारी की शुरुआत का वह मंज़र जब कोरोना शब्द भय, असुरक्षा और डरावनी चिंता का विषय बन रहा था और अपने ही अपनों से दूर हो रहे थे....एक तरफ मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था, विश्व भर ...
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जब लाशों को अस्‍पतालों और मर्च्‍युरी से सफेद प्‍लास्टिक में लपेटकर किसी उत्‍पाद की तरह श्मशानों तक पहुंचाया जा रहा हो, जब कोई बेटी एक एक सांस के लिए लड़ रहे अपने पिता के लिए बदहवास होकर अस्‍पताल में डॉक्‍टर और ऑक्‍सीजन ढूंढ रही हो...
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2020, इस साल ने हमें पूरी एक सदी का सबक दे दिया, हमने समझा कि प्रकृति का महत्‍व क्‍या है, इस बरस हमने सही मायनों में जान की कीमत को समझा। हमने जाना कि अपनों को खोने का दर्द क्‍या होता है और अपनों के करीब होने का सुख क्‍या होता है। लेकिन यह सारा ...
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वेबदुनिया की अपनी 20 वर्षीय यशस्वी यात्रा में आप सभी और हमारे करोड़ों पाठक हर मोड़, हर पड़ाव के साक्षी रहे हैं। कभी सामग्री को लेकर तो कभी वेबदुनिया के रूप-स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर...हम बदलाव को आपके समक्ष लेकर आए और परिवार के सदस्य की तरह आप सभी ने ...
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जो डॉक्‍टर किसी की जान बचाता है, उसे आमतौर पर लोग अपना भगवान ही मानते हैं। ठीक है, आप उन्‍हें भगवान मत मानिए, लेकिन जो शख्‍स आपका इलाज करने के लिए आपके घर के दरवाजे पर आया है उसे डॉक्‍टर तो मानि‍ए।
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दुनिया की बात हो, भारत की बात हो या फिर इंदौर शहर की बात हो, कोरोना वायरस (Corona Virus) से संक्रमित लोगों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन, बड़ा प्रश्न यह है कि क्या बढ़ते आंकड़े से डरने की जरूरत है? दरअसल, डरना तो बिलकुल भी नहीं चाहिए। इसे रोकने ...
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अटल बिहारी बाजपेयी सिर्फ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि एक सरल ह्रदय इंसान, लोकप्रिय राजनेता, उम्दा कवि और बेहतरीन साहित्यकार थे... शायद इसलिए ही वे राजनीति में रहते हुए भी सामाजिक विषयों की गहनता को समझते हुए जनता के दिलों में जगह बना ...
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तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक तरह से 'अनाथ' हो गई है। पहले अम्मा (जयललिता) और फिर उडनपिराप्पे (करुणानिधि को लाखों डीएमके कार्यकर्ता उडनपिराप्पे याने बड़ा भाई पुकारते थे)। दक्षिण भारत के बड़े राज्य की राजनीति में बने शून्य ने कई सवालों को जन्म दिया ...
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दुनिया को शांति का संदेश देने वाले देश में आज एक 'भयानक भीड़ संस्कृति' जन्म ले रही है जो सवाल उठा रही है कि क्या अमन पसंद हिन्दुस्तान अब 'लिंचिंस्तान' बनता जा रहा है..
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फूलों ने ही तो जीवन सृजन किया है इसीलिए जब भी हमारे लगाए पौधे में फूल खिलते हैं तो हम भी खिल उठते हैं। शायद ही कोई होगा जिसे मैदानों, पर्वतों पर आच्छादित ताजी हरी घास-फूस की खुशबू भली न लगती हो। लेकिन जिस तरह से धरती से उसका हरित श्रंगार मिट रहा है ...
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त्रिपुरा में ऐतिहासिक सफलता और सत्ता के उन्माद में भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ब्लादिमीर लेनिन की प्रतिमा ध्वस्त कर दी। वैचारिक असाम्य के कारण मूर्ति तोड़ने का यह सिलसिला त्रिपुरा से तमिलनाडु और फिर पश्चिम बंगाल होता हुआ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर ...
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जब भी साल बदलता है, हमें ठहरकर सोचने पर मजबूर करता है। यों तो हर पल गतिमान समय की धार में साल, वर्ष, बरस… जो भी कह लें, एक छोटा–सा बिंदु है ... पर चूँकि हम इसी बहाने से ईस्वी सन वाला दीवारों पर टँगा कैलेंडर बदलते हैं, आँकड़ा बदलते हैं, तो इस वक्फे का ...
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बहुत सारे विश्लेषक और राजनीति के जानकार मानकर चल रहे थे कि गुजरात में कशमकश वाली कोई बात नहीं है। राहुल गाँधी के नेतृत्व को गुजरात में कोई नहीं स्वीकारेगा और भाजपा की एकतरफा जीत होगी। ये भी कि जीएसटी और नोटबंदी गुजरात में कोई मुद्दा नहीं है। कि ...
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आठ नवंबर 2016 को रात आठ बजे अचानक ये घोषणा हुई कि अब ये रेल नोटबंदी के स्टेशन की तरफ़ जाएगी। एक ऐसी रेल जिसमें सवार यात्रियों को ना इसके चलने का समय पता था ना अचानक से गंतव्य बदल दिए जाने की जानकारी। भीतर बैठे यात्री कुछ चौंक गए, कुछ सकते में आ गए, ...
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लोग धरती को सींचने के नए तरीके ढ़ूँढ़ रहे थे .... और हमने बादलों पर पैर रक्खे हुए थे। हम आसमान में खेती कर रहे थे…..सब हँस भी रहे थे..... यहाँ धरती सोना उगल रही है और ये वहाँ आसमान में सपनों की खेती कर रहे हैं!!! .....सच, सपना ही तो था .... सचमुच का ...
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शिखर पर अकेलापन होता है। महान प्रतिभाएँ महान संकटों के लिए अभिशप्त हैं। ऊपर चढ़ते वक्त वो कौन सा बिन्दु है जिसे आप अंतिम पड़ाव मान लेंगे? आपकी यात्रा में सर्वोच्च क्या है? आपके मन का हिमालय कौन सा है? सफलता के झिलमिल सितारों के बीच वो कौन सा वक्त होगा ...
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राष्ट्रवाद की समूची अवधारणा को ही चुनौती देने और नए-नए तरीकों से राष्ट्रवाद को गढ़ने के इस दौर में एक और नए तरह का शिगूफ़ा सिर उठा रहा है। राजनीति को विकास के एजेंडे से भटकाकर क्षेत्रवाद की नई इबारतें लिखी जा रही हैं। क्षेत्रीय विविधताओं को आपस में ...
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