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Govardhan Puja vidhi: अन्नकूट और गोवर्धन पूजा की संपूर्ण विधि

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 (10:06 IST)
Govardhan Annakut mahotsav 2025: कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि के दिन अन्नकूट महोत्सव और गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन को सुहाग पड़वा भी कहते हैं। आज ही के दिन योगेश्वर भगवान कृष्ण ने इन्द्र का मान-मर्दन करते हुए अपने वाम हस्त की कनिष्ठा अंगुली के नख पर गोवर्धन पर्वत उठाकर इन्द्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसी की याद में यह महोत्सव मनाते हैं। जानिए कैसे मनाएं ये पर्व।
 
गोवर्धन पूजा की सामग्री: Govardhan puja samagri-
पूजा की थाली में रोली, चावल, बताशे, धूप, तेल का दीपक, कलश में जल, केसर, नैवेद्य, धूप, मिठाई, गंगाजल, पान, फूल, दही, शहद, फूल माला, खीर आदि रखकर उससे गोवर्धन पर्वत के चित्र की पूजा करें।
 
गोवर्धन पूजा विधि: Govardhan Puja vidhi-
- दीपावली के बाद यह दिन परस्पर भेंट का दिन भी होता है।
- एक-दूसरे के गले लगकर दीपावली की शुभकामनाएं दी जाती हैं।
- गृहिणियां मेहमानों का स्वागत करती हैं।
- लोग छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का भेद भूलकर आपस में मिल-जुलकर यह त्योहार मनाते हैं।
- इस दिन परिवार, कुल खानदान के सभी लोग एक जगह इकट्ठे होकर गोवर्धन और श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं।
- पूजा के बाद में भोजन करते हैं और शगुन स्वरूप जुआ भी खेलते हैं। 
- इस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर गोवर्धन की पूजा करते हैं।
- प्रात:काल भगवान कृष्ण का ऐसा चित्र जिसमें वे गोवर्धन पर्वत हाथ में धारण किए खड़े हों अपने पूजाघर में लगाकर उसकी पूजा की जाती हैं।
- इस दिन प्रात:काल स्नान करने के उपरान्त घर की दहलिज के बाहर गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है।
- पूजा के बाद कई तरह के पकवान बनाकर भोग स्वरूप रखते हैं।
- सायंकाल गोवर्धन विग्रह का पंचोपचार विधि से पूजन करें और 56 प्रकार के पकवान बनाकर भोग अर्पित करें।
- ग्रामीण क्षेत्र में अन्नकूट महोत्सव इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन नए अनाज की शुरुआत भगवान को भोग लगाकर की जाती है।
- इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है और गौमाता को मिठाई खिलाकर उसकी आरती उतारते हैं तथा प्रदक्षिणा भी करते हैं।


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