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भगवान धन्वंतरि का यह पौराणिक मंत्र देगा आरोग्य का वरदान

Updated: गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016 (11:39 IST)
हिन्दू धर्म में धन्वंतरि देवताओं के वैद्य माने गए हैं। धन्वंतरि महान चिकित्सक थे। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनवंतरि भगवान विष्णु के अवतार समझे गए हैं। समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि का पृथ्वी लोक में अवतरण हुआ था। 

 
शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरि, चतुर्दशी को काली माता और अमावस्या को भगवती लक्ष्मी जी का सागर से प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिए दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस को भगवान धन्वंतरि का जन्म धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। 
 
भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने का अत्यंत सरल मंत्र है:
 
ॐ धन्वंतराये नमः॥
आरोग्य प्राप्ति हेतु धन्वंतरि देव का पौराणिक मंत्र 
 
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥
 
अर्थात् परम भगवन को, जिन्हें सुदर्शन वासुदेव धन्वंतरि कहते हैं, जो अमृत कलश लिए हैं, सर्व भयनाशक हैं, सर्व रोग नाश करते हैं, तीनों लोकों के स्वामी हैं और उनका निर्वाह करने वाले हैं; उन विष्णु स्वरूप धन्वंतरि को सादर नमन है।
 
पवित्र  धन्वंतरि स्तो‍त्र : 
 
ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥
कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारूपीतांबराढ्यम।
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम॥

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