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योगासन में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है सूर्य नमस्कार, प्रतिदिन करेंगे तो बनेंगे निरोग, रहेंगे हमेशा स्वस्थ

बुधवार,जून 19, 2019
surya namaskar
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दैनिक जीवन के विभिन्न कार्यों में स्वरों की स्थिति का बहुत महत्व देखा जाता है। स्वर ज्ञाता ज्योतिषियों की भांति इसका ...
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ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन करने के लिए सबसे पहले शांत चित्त होकर शरीर ढीला करके बिल्कुल सीधे होकर बैठें।
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हमारे सनातन धर्म में समाधिस्थ ऋषि मुनियों ने समाधि के कुछ लक्षण बताए हैं। आइए जानते हैं कि समाधि के अष्ट लक्षण कौन से ...
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ध्यान शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए बिलकुल निःशुल्क हानिरहित उपचार पद्धति है। जब भी एकाग्र मन से किसी भी विषय में ...
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'योग' भारत में एक आध्यात्मिक प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। यह ...
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हर कोई चाहता है कि जब तक वह जीवित रहे, स्वस्थ ही रहे। स्वस्थ रहते हुए ही अपने बच्चों को बड़ा होते देखे व अपने नाती-पोतों ...
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योग यानी जुड़ना और जुड़ना जिससे भी सच्चे मन से हो जाए, उससे ही योग लग जाता है। जब किसी को किसी से योग लगता है तब यह सहज ...
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समाधिस्थ ऋषि मुनियों ने समाधि के कुछ लक्षण बताए हैं। आइए जानते हैं कि समाधि के अष्ट लक्षण कौन से होते हैं-
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ज्योतिष, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक आधार पर तैयार विविध रंगों के चक्र द्वारा मन-मस्तिष्क को संतुलित करने में मदद मिलती ...
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यूं तो प्राणायाम अनेक प्रकार के हैं, किन्तु यहां हम उन्हीं प्राणायाम की चर्चा करेंगे, जिन्हें गृहस्थी, बाल, युवा, ...
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मनुष्य में प्राणमयी शक्तियों को योग द्वारा, ध्यान द्वारा तथा सतत साधना से अति तीव्रता के साथ साध कर परिणाम प्राप्त करने ...
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योगनिद्रा द्वारा शरीर व मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। यह नींद की कमी को भी पूरा कर देती है। इससे थकान, तनाव व अवसाद भी दूर ...
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भावातीत ध्यान अनुभव की पूर्ण अवस्था को पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे अनुभव की क्षमता बढ़ जाती है। यह जीवन को ...
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अध्यात्म-विज्ञान के समन्वय पुरुष आचार्य महाप्रज्ञ के अनुसार मनुष्य का जीवन व्याधि और उपाधि इन दो दिशाओं में चलता है। ...
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ध्यान शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए बिलकुल निःशुल्क हानिरहित उपचार पद्धति है। इस सत्य को प्रायः हर उम्र तथा हर वय ...
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पौराणिक साहित्य में इच्छा को शक्ति या देवी का रूप दिया गया है। भावनोपनिषद 2 में क्रियाशक्ति को पीठ, ज्ञानशक्ति को ...
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जैसे आप ध्यान करते हैं, आप बॉस हो जाते हैं और आपका मन आपका सेवक बन जाता है और यह वह स्थिति है, जो हमेशा होनी चाहिए। एक ...
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भागदौड़ भरी जीवन शैली के चलते मनुष्य ने प्रकृति और स्वयं का सान्निध्य खो दिया है। इसी वजह से जीवन में कई तरह के रोग और ...
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मनुष्य को प्रकृति की ओर से संतुलित और सुडौल शरीर मिलता है, पर वह गलत रहन-सहन, बुरी आदत तथा खान-पान में अनियमितता के ...
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