फाइनल में मिली हार के ये 5 खिलाड़ी रहे सबसे बड़े मुजरिम

Last Updated: गुरुवार, 24 जून 2021 (13:18 IST)

न्यूजीलैंड के रूप में वर्ल्ड क्रिकेट को उनका पहला टेस्ट बादशाह मिल गया है। साउथम्प्टन में खेला गया पहला टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल कीवी टीम ने केन विलियमसन की कप्तानी में 8 विकेट से जीतकर अपने नाम किया।


इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही विलियमसन एंड कंपनी ने एक नया इतिहास भी रच दिया। वाकई में न्यूजीलैंड की जीत की हमेशा याद किया जाएगा। एक तरफ जहां कीवी टीम ने जीत का रिकॉर्ड बनाया तो दूसरी ओर टीम इंडिया को रनर-अप के तौर पर ही संतोष करना पड़ा।


फाइनल से पहले भारतीय टीम को खिताबी जीत का फेवरेट माना जा रहा था, लेकिन बल्लेबाजों के खराब प्रदर्शन के चलते टीम का विजेता बनने का सपना टूट गया।

चलिए हम आपको बताते हैं, भारतीय टीम की हार के 5 सबसे बड़े मुजरिम कौन रहे।




1 - जसप्रीत बुमराह : में अगर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के प्रदर्शन पर नजर डाली जाए तो यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि बुमराह हार के सबसे बड़े मुजरिम रहे। दोनों पारियों में बुमराह विकेट लेने के लिए संघर्ष करते नजर आए। पहली पारी में उन्होंने 26 ओवर की गेंदबाजी में 57 रन खर्च कर दिए, तो दूसरी पारी में 10.4 ओवर की गेंदबाजी में 35 रन लुटा डाले।


2 – शुभमन गिल : इंग्लैंड सीरीज में फेल होने के बाद भी को फाइनल खेलने का मौका मिला था, लेकिन दोनों पारियों में उन्होंने फैंस को खासा निराश किया। पहली पारी में 28 और दूसरी पारी में उनके बल्ले से मात्र 8 रन देखने को मिले। आलम तो यहां तक है कि अब उनको टीम से ड्रॉप करने की मांग तक उठने लगी है।




3 - रवींद्र जडेजा : टेस्ट टीम के नंबर- 1 ऑल राउंडर का निर्णायक मुकाबले में न तो बल्ला चला न गेंद से कमाल दिखा पाए। पूरे मैच सिर्फ 1 विकेट और मात्र 31 रन बनाए।



4 - रोहित शर्मा : फाइनल में टीम को एक अच्छा स्टार्ट दिलाने की जिम्मेदारी अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा की थी और ऐसा नहीं कि उनको दोनों पारियों में अच्छा आगाज नहीं मिला। निराशा की बात यह रही कि अपने मिले स्टार्ट को वह बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके और अपनी विकेट तोहफे में दे बैठे। पहली पारी 68 गेंद 34 रन और दूसरी पारी 81 गेंद 30 रन उनके बल्ले से देखने को मिले।



5 – चेतेश्वर पुजारा : इस लिस्ट में अंतिम नाम टीम इंडिया की नई दीवार चेतेश्वर पुजारा का आता है। इंग्लैंड की कठिन परिस्तिथियों में बल्लेबाजी करने के लिए पुजारा टीम इंडिया के सबसे बढ़िया बल्लेबाज थे, क्योंकि उनके पास काउंटी में खेलने का अनुभव था। मगर फाइनल में उनके बल्ले को भी मानो जंग लग गई। पहली पारी 54 गेंद सिर्फ आठ रन, दूसरी पारी 80 गेंद 15 रन बनाए।



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