सम्बंधित जानकारी
- सुप्रीम कोर्ट की सरकार को चेतावनी, किसान आंदोलन भी तब्लीगी जमात न बन जाए
- कोरोना के कारण 2020 में 600 पत्रकारों की मौत
- भारत में Covid 19 के 20,346 नए मामले, 222 और लोगों की मौत
- PM मोदी ने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से की बात, कोरोना वैक्सीन पर हुई चर्चा
- COVID-19 : महाराष्ट्र की कंपनी ने 'कोविशील्ड' ट्रेडमार्क पर किया दावा, एसआईआई को जारी किया नोटिस
Coronavirus | कोरोनावायरस के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा महीनों बाद तक रह सकती है : अध्ययन
नई दिल्ली। एक अध्ययन के अनुसार कोविड-19 संक्रमण से उबर चुके लोगों में सार्स-कोव-2 वायरस से पैदा होने वाली गंभीर बीमारियों के खिलाफ महीनों या वर्षों बाद तक सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा रह सकती है। यह निष्कर्ष कोविड-19 के 188 रोगियों के रक्त नमूनों के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है और इसमें कहा गया है कि रोग से उबर चुके लगभग सभी लोगों में पुन: संक्रमण से लड़ने के लिए आवश्यक प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं।
ALSO READ: कोरोना के कारण 2020 में 600 पत्रकारों की मौत
अमेरिका के ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी में प्रोफेसर एलेसेंड्रो सेट्टे के अनुसार हमारे आंकड़ों का कहना है कि प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है और यह कायम रहती है। अध्ययनकर्ताओं ने एक ही समय 'एंटीबॉडी, बी कोशिकाओं, टी कोशिकाओं और घातक टी कोशिकाओं' पर गौर किया। ये चारों घटक प्रतिरक्षा के लिहाज से अहम हैं।
यह अध्ययन 'साइंस' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और इससे अन्य संस्थानों के उन आंकड़ों को स्पष्ट करने में मदद मिलती है जिनमें कहा गया है कि संक्रमण के बाद के महीनों में कोविड से लड़ने वाले एंटीबॉडी में खासी कमी आती है। कुछ लोगों की आशंका रही है कि एंटीबॉडी में गिरावट का अर्थ है कि शरीर पुन: संक्रमण से बचाव के लिए तैयार नहीं हो पाएगा। सेट्टे ने स्पष्ट किया कि एंटीबॉडी में गिरावट बहुत सामान्य बात है। निश्चित रूप से प्रतिरक्षा क्षमता समय के साथ कुछ हद तक कम हो जाती है, लेकिन यह सामान्य बात है। (भाषा)
