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Last Modified: मुंबई , सोमवार, 16 फ़रवरी 2026 (23:17 IST)

राफेल से हैमर मिसाइल तक, क्या फ्रांस बनेगा भारत का ‘नया रूस’? मोदी- मैक्रों मुलाकात से खुलेंगे रक्षा सौदों के बड़े दरवाजे

modi and micro
भारत-फ्रांस सहयोग अब केवल मिसाइल और जेट तक सीमित नहीं है। राफेल इकोसिस्टम में अब मेंटेनेंस, वेपन सिस्टम और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हो चुके हैं। एयरो-इंजन डेवलपमेंट पर भी चर्चा तेज है। 17 फरवरी 2026 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच महत्पूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात होने जा रही है। ये बैठक भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते रिश्तों को और नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। बदलते वैश्विक हालात में भारत और फ्रांस की भूमिका को लेकर यह चर्चा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आधिकारिक यात्रा पर हैं मैक्रों

राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। ये यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरान वे भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लेंगे। ये राष्ट्रपति मैक्रों का चौथा भारत दौरा है, जबकि मुंबई की ये उनकी पहली यात्रा होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच HAMMER मिसाइल के भारत में निर्माण को लेकर नई डील आगे बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाया जाएगा।

कहां और कब होगी बैठक

मीडिया खबरों के मुताबिक मुंबई में मौजूद लोक भवन में 17 फरवरी को दोपहर करीब 3.15 बजे दोनों नेताओं के बीच औपचारिक बैठक तय की गई है। बैठक में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक, स्वच्छ और परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और साइबर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।  इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति, वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े अहम मुद्दों पर भी दोनों नेता विचार साझा करेंगे। दोनों देश अब केवल खरीददार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

26 समुद्री राफेल विमान मिलेंगे 

मीडिया खबरों के मुताबिक इस दिशा में Bharat Electronics Limited और Safran Electronics & Defence के बीच पिछले साल नवंबर में 50-50 साझेदारी के तहत संयुक्त उद्यम समझौता हो चुका है। तैयार की जाने वाली मिसाइलों का उपयोग भारतीय वायुसेना और नौसेना अपने राफेल विमानों पर करेगी। भारतीय नौसेना को 2028 से 26 समुद्री राफेल विमान मिलने हैं।
भारत MRFA कार्यक्रम के तहत 114 और राफेल विमानों की खरीद की योजना भी बना रहा है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए की इस परियोजना को हाल ही में रक्षा मंत्रालय की मंजूरी मिली है और अधिकतर विमान भारत में ही बनाए जाने की संभावना है। Edited by : Sudhir Sharma
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