एपिफेनी (Epiphany), जिसे 'थ्री किंग्स डे' (Three Kings Day) भी कहा जाता है, ईसाई धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह हर साल 6 जनवरी को मनाया जाता है। इसके बाद विश्व के करीब 15 देशों में 7 जनवरी को क्रिसमस मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस दिन से जुड़ी कुछ खास बातें।
एपिफेनी क्या है?
1. इसका मुख्य महत्व
यह दिन उस घटना की याद में मनाया जाता है जब तीन बुद्धिमान व्यक्ति (The Three Wise Men / Magi) बाल यीशु (Jesus) के दर्शन करने पहुंचे थे। वे एक चमकते सितारे का पीछा करते हुए बेथलेहम आए थे और उन्होंने यीशु को राजा मानकर सोना, लोबान और गंधरस (Gold, Frankincense, and Myrrh) भेंट किया था।
2. 'एपिफेनी' शब्द का अर्थ
'एपिफेनी' एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ होता है "प्रकटीकरण" (Manifestation)। यह इस बात का प्रतीक है कि भगवान ने खुद को एक मनुष्य (यीशु) के रूप में पूरी दुनिया के सामने प्रकट किया।
3. क्रिसमस का समापन
कहा जाता है कि क्रिसमस के 12 दिन बाद यह त्यौहार आता है। कई देशों में इसे "12th Night" के रूप में मनाया जाता है, और इसी दिन लोग अपने घरों से क्रिसमस की सजावट और पेड़ (Christmas Tree) हटाते हैं।
4. अलग-अलग परंपराएं
पश्चिमी चर्च: यहाँ मुख्य रूप से तीन बुद्धिमान व्यक्तियों की यात्रा पर ध्यान दिया जाता है।
पूर्वी चर्च (Orthodox): यहाँ इस दिन को यीशु के बपतिस्मा (Baptism) के रूप में मनाया जाता है। रूस और ग्रीस जैसे देशों में लोग पवित्र नदियों के ठंडे पानी में डुबकी लगाकर इसे मनाते हैं।
मिठाई और केक: कई देशों में 'किंग केक' (King Cake) बनाने की परंपरा है। केक के अंदर एक छोटा सा खिलौना या सिक्का छिपाया जाता है, और जिसे वह मिलता है, उसे दिन का 'राजा' या 'रानी' माना जाता है।
5. तीन बुद्धिमान व्यक्ति (Magi) कौन थे?
बाइबल के अनुसार, ये तीन लोग पूर्व दिशा से आए थे। उन्हें कैस्पर (Caspar), मेलचियोर (Melchior), और बालथाज़ार (Balthasar) के नाम से जाना जाता है। वे खगोलशास्त्री या ज्योतिषी थे जिन्होंने आसमान में एक अद्भुत तारा देखा और समझ गए कि यह किसी महान राजा के जन्म का संकेत है।
6. उनके द्वारा दिए गए उपहारों का रहस्य
उन्होंने यीशु को जो तीन उपहार दिए, उनका प्रतीकात्मक अर्थ बहुत गहरा है:
सोना (Gold): यह यीशु की 'राजसी गरिमा' (Kingship) का प्रतीक है।
लोबान (Frankincense): यह धूप की तरह इस्तेमाल होता था, जो यीशु की 'दिव्यता' (Divinity) या ईश्वर के स्वरूप का प्रतीक है।
गंधरस (Myrrh): यह एक सुगंधित तेल था जिसका उपयोग शवों के लेपन के लिए किया जाता था। यह यीशु के भविष्य में होने वाले 'बलिदान और मृत्यु' (Suffering and Death) का संकेत था।
7. जॉर्डन नदी में बपतिस्मा
जैसा कि पहले बताया, पूर्वी ईसाई परंपराओं (जैसे इथियोपिया या रूस में) में इस दिन का संबंध यीशु के बपतिस्मा से है। माना जाता है कि इसी दिन सेंट जॉन द बैपटिस्ट ने जॉर्डन नदी में यीशु को बपतिस्मा दिया था, और इसी समय ईश्वर की आवाज़ ने उन्हें अपना पुत्र घोषित किया था।
8. दुनिया भर में अलग-अलग परंपराएं:
स्पेन और लैटिन अमेरिका: यहाँ यह दिन क्रिसमस से भी बड़ा माना जाता है। बच्चे रात को अपने जूते बाहर रखते हैं ताकि 'तीन राजा' उनमें उपहार डाल सकें।
इटली: यहाँ एक बूढ़ी औरत की कहानी प्रसिद्ध है जिसे 'ला बेफाना' (La Befana) कहा जाता है। वह झाड़ू पर उड़कर आती है और बच्चों को उपहार देती है।
इथियोपिया: यहाँ इस त्यौहार को 'तिमकत' (Timkat) कहा जाता है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग जुलूस निकालते हैं और पानी के पास जाकर प्रार्थना करते हैं।
10.
7 जनवरी को क्रिसमय डे: ईसा मसीह की वास्तविक जन्म तिथि को लेकर एकमत नहीं है। कुछ इसे 25 दिसंबर, तो कुछ 7 जनवरी मानते हैं और कुछ बसंत ऋतु की कोई सी तारीख।
रूस, इजराइल, मिस्र, यूक्रेन, बु्ल्गारिया, माल्डोवा, मैक्डोनिया, इथियोपिया, जॉर्जिया, ग्रीस, रोमानिया, सर्बिया, बेलारूस, मोंटेनेग्रो, कजाखस्तान। दरअसल ग्रेगोरियन और जूलियन कैंलेडर में अंतर होने के कारण ऐसा है। ये लोग जूलियन कैलेंडर को फॉलो करते हैं।
यह भी कहते हैं कि पहले 7 जनवरी को ही क्रिसमस डे मनाया जाता था। 1752 में जब इंग्लैंड ने ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाना शुरू किया तो जूलियन कैलेंडर के साथ अंतर को पूरा करने के लिए दिनों को हटा दिया गया। कई लोगों ने इस बदलाव को स्वीकार नहीं किया और जूलियन कैलेंडर का उपयोग करना पसंद किया। अर्मेनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को एपिफेनी के साथ क्रिसमस मनाता है। रविवार सबसे पहला ईसाई उत्सव था। दूसरी शताब्दी में, पुनरुत्थान एक अलग दावत बन गया और 6 जनवरी को पूर्वी चर्चों में एपिफेनी मनाया जाने लगा। एपिफेनी यानी यह रहस्योद्घाटन कि यीशु ईश्वर का पुत्र था।
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