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बाल दिवस : ऐसा था नेहरूजी का बाल प्रेम

Written By WD
Updated: गुरुवार, 10 नवंबर 2016 (12:27 IST)
जब पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे और तीन मूर्ति भवन उनका सरकारी निवास था। एक दिन तीन मूर्ति भवन के बगीचे में लगे पेड़-पौधों के बीच से गुजरते हुए घुमावदार रास्ते पर नेहरू जी टहल रहे थे और पौधों पर छाई बहार देखकर खुशी से निहाल हो ही रहे थे तभी उन्हें एक छोटे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। 

नेहरू जी ने आसपास देखा तो उन्हें पेड़ों के बीच एक-दो माह का बच्चा दिखाई दिया जो दहाड़ मारकर रो रहा था। नेहरूजी ने मन ही मन सोचा- इसकी मां कहां होगी? उन्होंने इधर-उधर देखा। वह कहीं भी नजर नहीं आ रही थी।
 
चाचा जी ने सोचा शायद वह बगीचे में ही कहीं माली के साथ काम कर रही होगी। नेहरूजी यह सोच ही रहे थे कि बच्चे ने रोना तेज कर दिया। इस पर उन्होंने उस बच्चे की मां की भूमिका निभाने का मन बना लिया।
 
नेहरूजी ने बच्चे को उठाकर अपनी बांहों में लेकर उसे थपकियां दीं,तो बच्चा चुप हो गया और मुस्कुराने लगा। बच्चे को मुस्कुराते देख चाचा जी खुश हो गए और बच्चे के साथ खेलने लगे।
 
जब बच्चे की मां दौड़ते वहां पहुंची तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। उसका बच्चा नेहरूजी की गोद में मंद-मंद मुस्कुरा रहा था। 
 
ऐसे ही एक बार जब पंडित नेहरू जी तमिलनाडु के दौरे पर गए, तब जिस सड़क से वे गुजर रहे थे वहां वे लोग साइकिलों पर खड़े होकर तो कहीं दीवारों पर चढ़कर नेताजी को निहार रहे थे। 
 
प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए हर आदमी इतना उत्सुक था कि जिसे जहां समझ आया वहां खड़े होकर नेहरू को निहारने लगा। इस भीड़भरे इलाके में नेहरूजी ने देखा कि दूर खड़ा एक गुब्बारे वाला पंजों के बल खड़ा डगमगा रहा था। ऐसा लग रहा था कि उसके हाथों के तरह-तरह के रंगबिरंगी गुब्बारे मानो पंडितजी को देखने के लिए डोल रहे हो। 
 
नेहरूजी की गाड़ी जब गुब्बारे वाले तक पहुंची तो गाड़ी से उतर कर वे गुब्बारे खरीदने के लिए आगे बढ़े तो गुब्बारे वाला हक्का-बक्का-सा रह गया।
 
नेहरूजी ने अपने तमिल जानने वाले सचिव से कहकर सारे गुब्बारे खरीदवाएं और वहां उपस्थित सारे बच्चों को वे गुब्बारे बंटवा दिए। ऐसे प्यारे चाचा नेहरू को बच्चों के प्रति बहुत लगाव था। नेहरूजी के मन में बच्चों के प्रति विशेष प्रेम और सहानुभूति देखकर लोग उन्हें चाचा नेहरू के नाम से संबोधित करने लगे और जैसे-जैसे गुब्बारे बच्चों के हाथों तक पहुंचे, बच्चों ने चाचा नेहरू-चाचा नेहरू की तेज आवाज से वहां का वातावरण उल्लासित कर दिया। तभी से वे चाचा नेहरू के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
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