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आजादी के लिए हिंदुस्तान की उमंग

शनिवार,जनवरी 12, 2008
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अपने पहले पत्र में मैंने तुम्हें बताया था कि हमें संसार की किताब से ही दुनिया के शुरू का हाल मालूम हो सकता है। इस किताब में चट्टान, पहाड़, घाटियाँ, नदियाँ, समुद्र, ज्वालामुखी और हर एक चीज, जो हम अपने
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संसार पुस्‍तक है

शनिवार,जनवरी 12, 2008
तुम जब मेरे साथ रहती हो तो अक्‍सर बहुत-सी बातें पूछा करती हो और मैं उनका जवाब देने की कोशिश करता हूँ। लेकिन अब, जब तुम मसूरी में हो, और मैं इलाहाबाद में, हम दोनों उस तरह बातचीत नहीं कर सकते। इसलिए मैंने इरादा किया है कि कभी-कभी
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बच्चे एडवर्ल्ड के 'सुपरमैन'

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
चाचा नेहरू का दौर हो या 'मिसाइलमैन' के बाद की कहानी, बच्चे हर क्षेत्र में पहली वरीयता माने जाते रहे हैं। आजादी के बाद के दौर के बच्चों में और आज के बच्चों में जबर्दस्त परिवर्तन आया है। उस दौर के बच्चे गाते थे- नन्हा-मुन्ना राही हूँ
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मिलनसार व्यक्तित्व और दूरदृष्टि के धनी पंडित जवाहरलाल नेहरू का आम लोगों से गहरा जुड़ाव था। उनकी विशेषताओं और व्यवहार की छाप भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन एवं राजनीति में ही नहीं बल्कि आम लोगों में उनकी लोकप्रियता पर भी देखी जा सकती है।
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नेहरूजी और पुस्तकें

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
एक बार लखनऊ में वे अपने मित्र मोहनलाल सक्सेना के यहाँ ठहरे। स्वभाव के अनुसार उनकी नजर उनकी पुस्तकों की अलमारी पर गई। अलमारी में पुस्तकें बहुत अस्त-व्यस्त, उलटी-सीधी पड़ी देखकर उन्हें बड़ी वेदना हुई। वे उनकी धूल झाड़-पोंछकर उन्हें व्यवस्थित करने लगे।
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पं. जवाहरलाल नेहरू

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
इस प्रश्न का उत्तर देना कठिन है कि भारत जैसे विशाल देश के प्रधानमंत्री होने से जवाहरलाल की शोभा बढ़ी या जवाहरलाल जैसे ऊँचे व्यक्ति का प्रधानमन्त्रित पाकर भारत की शोभा-वृद्धि हुई
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स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित करने वाले (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1937, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याणी 1954) पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म इलाहाबाद में हुआ।
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ऐसे जिंदादिल थे पं. नेहरू

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
जवाहरलाल नेहरू का व्यक्तित्व निराला था। स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी रहे नेहरूजी जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने तब वे लगभग 58 वर्ष के 'युवा' थे और लगभग 17 वर्षों तक उस पद पर रहे। उनकी अत्यधिक व्यस्तता तथा तनावपूर्ण
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एक जवाहरलाल

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
राष्ट्रवाटिका के पुष्पों में, एक जवाहरलाल। जन्म लिया जिस दिन लाल ने, दिवस कहाया बाल॥
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जन्मदिवस का एक प्रसंग

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
14 नवंबर को पं. जवाहरलाल नेहरू का 73वाँ जन्मदिवस पड़ा। पंजाब की जनता ने प्रधानमंत्री सुरक्षा कोष में योगदान देने के लिए नेहरूजी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर उन्हें सोने से तौलने का निर्णय किया।
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काफी पुरानी बात है। पं. जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री पद पर विराजमान थे। दिल्ली में हिन्दी की प्रतिष्ठित कवयित्री महादेवी वर्मा के सम्मान में एक समारोह का आयोजन किया गया था। पं. नेहरू भी उस समारोह में सम्मिलित हुए थे।
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ऐसे थे पं. नेहरू

सोमवार,दिसंबर 24, 2007
जवाहरलाल नेहरू के बाल्यकाल की घटना है। उनके घर पिंजरे में एक तोता पलता था। पिता मोतीलालजी ने तोते की देखभाल का जिम्मा अपने माली को सौंप रखा था। एक बार नेहरूजी स्कूल से वापस आए तो तोता उन्हें देखकर जोर-जोर से बोलने लगा।
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कुबेर के ऐश्वर्य को त्यागकर, स्वाधीनता आंदोलन के कंटकाकीर्ण पथ पर चल पड़ना और वर्षों तक कारावास भोगना, इस दृढ़ विश्वास के साथ कि एक न एक दिन दिल्ली के लाल किले पर यूनियन जैक की जगह तिरंगा अवश्य फहराएगा, केवल नेहरू के बस की ही बात थी।
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स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व में पहला ऐतिहासिक आम चुनाव संपन्न कराया गया तथा वास्तविक प्रजातंत्र की आधारशिला रखी गई। 1947 से 1952 तक का लगभग पाँच वर्षों का कार्यकाल पं. नेहरू के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।
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गाँधीजी ने अनेक बार घोषणा की थी कि पंडित नेहरू ही उनके उत्तराधिकारी होंगे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी उन्होंने ही पं. नेहरू को प्रधानमंत्री बनवाया था। गाँधीजी के जीवनकाल और वर्तमान में भी यह प्रश्न उठाया जाता रहा है
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चौदह नवंबर बाल दिवस के रूप में मनाने का औचित्य यह है कि पं. जवाहरलाल नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। उनकी यह अवधारणा सौ फीसदी सत्य है, क्योंकि आज जन्मा शिशु भविष्य में राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक, लेखक, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर
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घटना अंकलेश्वर की है। उन दिनों वहाँ तेल की खोज के लिए अनेक कुएँ खोदे गए थे। एक कुएँ में से जब तेल की धारा फूट पड़ी तो सर्वत्र प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। तेल की यह धारा हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य की प्रतीक थी
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चाचा नेहरू के बाद बच्चों के दिलो दिमाग पर सबसे ज्यादा छाए हैं राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम। बच्चे उन्हें 'सर' कहकर पुकारना चाहते हैं। अधिकतर बच्चों का यह भी कहना है कि हेयर स्टाइल समेत 'कलाम सर' जैसे भी हैं, वैसे ही उन्हें पसंद हैं।
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आज बाल दिवस है, पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन, जिसे प्रतिवर्ष मनाते हैं और जो अब एक औपचारिकता मात्र रह गया है। नई पीढ़ी उस महान सपूत के बारे में कितनी जानकारी रखती है? किंतु उनका स्नेहासिक्त जीवन सबके लिए आज भी प्रेरणादायी है।
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