जूही चावला : हैप्पी बर्थ डे...
मां दुर्गा को श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं
जूही चावला का जन्म 13 नवंबर 1967 को लुधियाना में हुआ। जूही का जन्म जिस समय हुआ तब उत्तराभाद्रपद नक्षत्र चल रहा था। जिसके परिणामस्वरूप ही जूही सुंदर एवं सुखी है। आपके जन्म के समय चंद्र जिस राशि पर विराजमान था उसने भी भाग्यवान और संपन्न बनाया। चंद्र ने ही जूही को फिल्मी कलाकार बनाया। चंद्र की कुंडली में जो स्थिति है, उसके कारण ही बड़े से बड़ा विरोधी परास्त हो जाता है एवं सफलता आपके कदम चूमती है। कुंडली में बैठा सूर्य आपको आगे की योजना को सुव्यवस्थित करने की प्रेरणा प्रदान करता है। मंगल गुरु की राशि पर विराजमान रहने से आपको प्रसिद्धि दिलाता है। मंगल भी आपको ऐश्वर्यवान बनाता है। साथ ही स्वयं की मेहनत पर भाग्योदय एवं उन्नति होती है, ऐसा प्रभाव छोड़ता है। कुंडली में बुध जिस भाव में बैठा है वह भाग्योदय तो करता ही है, साथ ही दूसरे ग्रहों के अनिष्ठ प्रभाव को भी खत्म करता है। जूही के जन्म के समय गुरु सिंह राशि पर परिभ्रमण कर रहा था जो उच्च स्थान प्रदान करता है। कुंडली में गुरु की स्थिति वंश का नाम उज्ज्वल करने का भाग्य देती है एवं परोपकारी भी बनाती है। हंसमुख स्वभाव प्रदान करती है। शुक्र मिश्रित फल प्रदान करता है। जन्मपत्रिका में जन्म के समय शनि जिस राशि पर विराजमान था वह भी सर्वसुख प्रदान करता है एवं विरोधी पक्ष को परास्त करने के गुण प्रदान करता है। राहु स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ दे सकता है। केतु भी स्वास्थ्य की दृष्टि से कष्ट दे सकता है। अत: ध्यान देना चाहिए। आपका जन्म शनि की महादशा में हुआ है, जिसका भोग्यकाल 7 वर्ष 3 माह 25 दिन रहा। आपको नौ ग्रहों की शांति करवाना चाहिए तथा मां दुर्गा को पूर्ण श्रृंगार सामग्री चढ़ाना लाभदायी रहेगा। आगामी दिसंबर माह आपके लिए ठीक रहेगा। जनवरी 2012 अच्छा रहेगा। फरवरी, मार्च संघर्ष वाला रहेगा। मई के अंतिम सप्ताह में हल्की चोट या दुर्घटना के योग बनते है, ध्यान दें। जून व जुलाई अच्छा रहेगा एवं 2012 में बड़े ऑफर मिलते रहेंगे। अगस्त-सितंबर सामान्य रहेगा। अक्टूबर सामान्य, लेकिन अंतिम सप्ताह अच्छा रहेगा। आपको किसी की माह की 5 तारीख को बड़े अधिकारियों से नहीं मिलना चाहिए। शुक्रवार को लंबी यात्रा नहीं करनी चाहिए। आश्लेषा नक्षत्र में किसी बड़े ऑफर पर साइन न करें। चतुर्थ प्रहर में अपने अच्छे कार्य के लिए कम निकलें। पन्ना एवं नीलम का संयुक्त लॉकेट धारण करना फलदाई रहेगा। इति शुभम्।।
लेखक के बारे में
पं. सुरेन्द्र बिल्लौरे