1. खबर-संसार
  2. »
  3. करियर
  4. »
  5. करियर विकल्प

सिविल इंजीनियरिंग

पुराना फिर भी सुहाना करियर

सिविल इंजीनियरिंग
- अशोक जोशी

ND
सिविल इंजीनियर वे व्यक्ति होते हैं, जो कई तरह के इंजीनियरिंग पेशों में से एक सिविल इंजीनियरिंग की प्रैक्टिस करते हैं। मूल रूप से सिविल इंजीनियर लोक निर्माण परियोजनाओं पर कार्य करते हैं जिन्हें मिलिट्री इंजीनियरों से अलग माना जाता था जो हथियारों और सुरक्षा निर्माण कार्यों में संलग्न रहते हैं। बाद में इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं जिनमें केमिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग शामिल हैं, को सिविल इंजीनियरिंग से अलग माना गया है। जबकि मिलिट्री इंजीनियरिंग के अधिकांश कार्य को सिविल इंजीनियरिंग में शामिल कर लिया गया।

अधिकांश देशों में सिविल इंजीनियरिंग पोस्ट सेकंडरी स्कूल के सिविल इंजीनियरिंग डिग्रीधारक होते हैं, जिसके लिए गणित तथा भौतिक शास्त्र की मजबूत पृष्ठभूमि होना आवश्यक है। यह डिग्री चार वर्ष अवधि की होती है, फिर भी कई सिविल इंजीनियर इस क्षेत्र में सुविज्ञता हासिल करने के लिए मास्टर्स, डॉक्टर्स और पोस्ट डॉक्टोरल डिग्री प्राप्त करते हैं। कई देशों में कोई भी सिविल इंजीनियरिंग डिग्रीधारी तब तक अपने आप को सिविल इंजीनियर नहीं कह सकता जब तक कि वह इसका लाइसेंस नहीं ले लेता।

अमेरिका में अधिकांश सिविल इंजीनियर इस क्षेत्र में विशेष क्षेत्र यथा जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग, एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग या हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कार्य करते हैं। आमतौर पर यह नगरीय निकायों, निर्माण संस्थानों, परामर्श फर्मों, राज्य सरकारों तथा केंद्र सरकार के लोक निर्माण विभागों में रोजगार पाते हैं।

सिविल इंजीनियर का कार्यक्षेत्र
आमतौर पर सिविल इंजीनियर का कार्यक्षेत्र किसी भी प्रोजेक्ट की प्लानिंग तथा डिजाइनिंग, उसका वांछित पैमाने पर निर्माण तथा रखरखाव तक सीमित होता है। उसके लिए उनके पास न केवल उच्चस्तरीय इंजीनियरिंग ज्ञान का होना जरूरी है, बल्कि पर्यवेक्षण और प्रशासन कौशल भी होना चाहिए। इनके अंतर्गत साइट इंवेस्टीगेशन, संभावना अध्ययन, जटिलताओं का समाधान तथा स्ट्रक्चर्स की वास्तविक डिजाइनिंग के कार्य आते हैं। उन्हें राज्य सरकारों के प्राधिकरणों के मार्गदर्शन में काम करना होता है तथा उनके प्लान को संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
सिविल इंजीनियर वे व्यक्ति होते हैं, जो कई तरह के इंजीनियरिंग पेशों में से एक सिविल इंजीनियरिंग की प्रैक्टिस करते हैं। मूल रूप से सिविल इंजीनियर लोक निर्माण परियोजनाओं पर कार्य करते हैं जिन्हें मिलिट्री इंजीनियरों से अलग माना जाता था।


वे लागत आकलन करते हैं तथा निर्माण कार्यक्रम बनाते हैं। निर्माण कार्य में ग्राहकों, आर्किटेक्ट्स, सरकारी अधिकारियों तथा ठेकेदारों से संपर्क बनाए रखना व मापदंड के अनुसार कार्य का पर्यवेक्षण करना होता है। उनके कार्यों में प्रोजेक्ट का मेंटेनेंस और रिपेयर भी शामिल है। सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मुख्य विशेषज्ञताओं वाले क्षेत्र स्ट्रक्चरल, वाटर रिसोर्सेज, एनवायरमेंटल, कंस्ट्रक्शन, ट्रांसपोर्टेशन, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग आदि हैं। वे निर्माण स्थल पर सुपरवाइजर अथवा मैनजेरियल पोजिशन या डिजाइन रिसर्च के साथ-साथ सरकारी या निजी महाविद्यालयों में शिक्षण का कार्य कर सकते हैं। यदि वे चाहें तो स्वतंत्र कंसलटेंसी खोलकर कंस्ट्रक्शन संबंधी मार्गदर्शन भी प्रदान कर सकते हैं।

रोजगार संभावनाएँ
सिविल इंजीनियर को सरकारी विभागों, निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों, अनुसंधान तथा शिक्षण संस्थानों में रोजगार की अपार संभावनाएँ उपलब्ध हैं। जिस तरह की सारी दुनिया में रियल इस्टेट और निर्माण कार्यों की बाढ़ आई हुई है, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि यहाँ रोजगार की संभावनाएँ दिन पर दिन बढ़ती रहेंगी।

स्रोत : नईदुनिया अवसर

कोई भी युवा बीई या बीटेक करते ही रोड प्रोजेक्ट, बिल्डिंग वर्क, कंसलटेंसी फर्म क्वालिटी टेस्टिंग, लैबोरेटरीज तथा हाउसिंग सोसायटी में जॉब पा सकता है। विशेषज्ञों की राय है कि विकसित राष्ट्रों में अनुभवी सिविल इंजीनियरों की भारी माँग है। इस समय सिविल इंजीनियर केंद्र तथा राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं रेलवे, निजी निर्माण कंपनियों, मिलिट्री, इंजीनियरिंग सेवाओं, कंसलटेंसी आदि में कार्यरत हैं।

शैक्षिक योग्यता
योग्य सिविल इंजीनियर बनने के लिए न्यूनतम योग्यता इंजीनियरिंग की स्नातक उपाधि है। रिसर्च और शिक्षण के लिए मास्टर्स डिग्री तथा प्रबंधन हेतु बिजनेस मैनेजमेंट या एडमिनिस्ट्रेशन की अतिरिक्त उपाधि आवश्यक है।

पाठ्यक्रम
इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम दो स्तरों पर उपलब्ध है। देश के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईआईटी द्वारा डिग्री तथा पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं, जबकि पोलिटेक्निक संस्थानों में डिप्लोमा कोर्स चलाया जाता है। इसके साथ ही निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों तथा डिप्लोमाधारी पत्राचार माध्यम से एसोसिएट मेंबरशिप एक्जामिनेशन ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (amie) देकर बैचलर डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।

आईआईटी, चेन्नई और इंस्टीट्यूट ऑव पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद द्वारा पत्राचार माध्यम से सिविल इंजीनियरिंग में एमएस पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है, जिसकी बुनियादी अर्हता बीई/बीटेक है। बीई तथा बीटेक में प्रवेश करने के लिए भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र तथा गणित में 10+2 या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

अवधि
बीई/बीटेक पाठ्यक्रमों की अवधि 4 वर्ष है, जबकि डिप्लोमा पाठ्यक्रम 2 से 3 वर्ष अवधि के हैं।

फीस
बीई के लिए प्रति वर्ष 40 हजार के आसपास शुल्क लगता है, जबकि आईआईटी की फीस 1.5 से लेकर 1.75 लाख रुपए प्रति वर्ष है।

संस्थान
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नोलॉजी नई दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी, कानपुर, खड़गपुर भारत के सर्वाधिक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। अन्य प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (विट्स), यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की तथा विभिन्न राज्यों के विभिन्न रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं।

चयन
बीई/बीटेक में चयन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। आईआईटी से बीटेक करने के लिए जेईई देनी आवश्यक है, जबकि एनआईटी में एआईआईआई द्वारा प्रवेश संभव है। विभिन्न राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेजों के पीईटी के आधार पर चयन किया जाता है। एमटेक करने के लिए जेएनयू की ऑल इंडिया कम्बाइंड प्रवेश परीक्षा या आईआईटी की 'गेट' परीक्षा देनी पड़ती है।

स्रोत : नईदुनिया अवसर