चक्रव्यूह की कहानी

Charkravyuha
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अपनी फिल्म के जरिये किसी न किसी सामाजिक मुद्दे को उठाने वाले फिल्मकार प्रकाश झा ने अपनी आगामी फिल्म ‘चक्रव्यूह’ में नक्सलवाद का मुद्दा उठाया है। चूंकि ये भारत के अंदर की लड़ाई है इसलिए इसे युद्ध तो नहीं कहा जा सकता है, लेकिन मोटे तौर पर यह एक तरह से युद्ध ही है। दुश्मन भी हमारा अपना ही है। कुछ लोगों में अन्याय, शोषण और भेदभाव को लेकर आक्रोश है। उनकी बात सुनी नहीं जा रही है इसलिए वे हिंसा का सहारा ले रहे हैं।

‘चक्रव्यूह’ की कहानी छ: किरदारों आदिल खान (अर्जुन रामपाल), कबीर (अभय देओल), रेहा मेनन (ईशा गुप्ता), रंजन (मनोज बाजपेयी), जूही (अंजलि पाटिल) और गोविंद सूर्यवंशी (ओमपुरी) के इर्दगिर्द घूमती है।

आदिल एक पुलिस ऑफिसर है और जो भी कानून तोड़ता है वो उसका दुश्मन है। उसकी पत्नी रेहा इंटेलिजेंस ऑफिसर है। रंजन एक क्रांतिकारी है। गोविंद लंदन में पढ़ा है, लेकिन बजाय किसी कॉरेपोरेट का लीडर होने के वह एक आंदोलन का लीडर बना है। कबीर एक विद्रोही है और आदिल के लिए कुछ भी कर सकता है। गरीबी में पैदा हुई जूही के पास बंदूक उठाने के सिवाय कोई चारा नहीं था।

समय ताम्रकर|
बैनर : प्रकाश झा प्रोडक्शन्स, इरोज इंटरनेशनल मीडिया लिमिटेड
निर्माता-निर्देशक : प्रकाश झासंगीत : सलीम-सुलेमान, विजय वर्मा, संदेश शांडिल्य, शांतनु मोइत्रा, आदेश श्रीवास्तव कलाकार : अभय देओल, अर्जुन रामपाल, ईशा गुप्ता, ओम पुरी, मनोज बाजपेयी, अंजलि पाटिल, चेतन पंडित, समीरा रेड्डी (आइटम सांग)रिलीज डेट : 24 अक्टूबर 2012
ये सब ऐसे चक्रव्यूह में हैं जिसमें उनकी वफादारी, सच, प्यार और विश्वास की परीक्षा कदम-कदम पर होती है।



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