प्रेम, त्याग और विरह की गाथा, सोनी सब के 'गणेश कार्तिकेय' में दिखेगा अद्भुत क्षण
सोनी सब का पौराणिक ड्रामा गाथा शिव परिवार की- गणेश कार्तिकेय अब दर्शकों को लेकर जा रहा है भगवान शिव और देवी सती की दिव्य यात्रा के उस मोड़ पर, जहाँ प्रेम, त्याग और विरह की गाथा जीवंत होती है। राजा दक्ष द्वारा आयोजित भव्य यज्ञ एक ऐसा क्षण बन जाता है, जो पूरी किस्मत की दिशा बदल देता है। रिश्तों की परीक्षा होती है और जीवन बदलने वाले फैसले लिए जाते हैं।
देवताओं और ब्रह्मांड की मौजूदगी में हुए भव्य विवाह के बाद देवी सती अपने नए जीवन की शुरुआत करती हैं। जहां एक ओर पूरी सृष्टि उनके मिलन पर आनंदित होती है, वहीं दूसरी ओर राजा दक्ष एक भव्य यज्ञ का आयोजन करते हैं और जानबूझकर भगवान शिव और देवी सती को आमंत्रित नहीं करते हैं।
देवी सती के मन में फिर भी उम्मीद रहती है कि बेटी का अपने पिता के घर में हमेशा स्थान होता है। इसी उम्मीद के साथ वे यज्ञ में जाती हैं, लेकिन वहाँ उन्हें अपमान का सामना करना पड़ता है। राजा दक्ष सबके सामने भगवान शिव का अपमान करते हैं और उनके विवाह पर सवाल उठाते हैं। एक बेटी और एक पत्नी के बीच टूटती हुई सती का दिल इस अपमान को सहन नहीं कर पाता।
अपने पति के सम्मान की रक्षा के लिए देवी सती अग्निकुंड में प्रवेश कर आत्मदाह कर लेती हैं। यह त्याग पूरे ब्रह्मांड को हिला देता है और भगवान शिव को प्रचंड तांडव की ओर ले जाता है। इसी के साथ वीरभद्र और भद्रकाली प्रकट होते हैं।
शो में देवी सती का किरदार निभाने वाली श्रेनु पारिख ने कहा, एक बेटी, जो अपने पिता की स्वीकृति चाहती है और साथ ही एक पत्नी, जो अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकती, यह निभाना आसान नहीं था। मुझे सबसे ज्यादा छू गया सती का वह असहाय पल। वह जिस उम्मीद को लेकर अपने पिता के घर जाती है, कुछ ही क्षणों में वही उम्मीद सबके सामने टूट जाती है।
उन्होंने कहा, जब मैंने यह दृश्य किया, तो लगातार सोच रही थी कि कितना दर्दनाक होता है यह महसूस करना कि जिस घर को आप अपना मानते थे, वह ही अब अपना नहीं रहा। मेरे लिए यह गुस्से की कहानी नहीं थी, बल्कि एक स्त्री के आत्मसम्मान की कहानी थी, जो चुपचाप अपना सम्मान चुनती है, भले ही उसका दिल टूट रहा हो। मुझे लगता है दर्शक भी उस दर्द को महसूस करेंगे और समझेंगे।