गुरुवार, 26 मार्च 2026
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वूमेंस डे स्पेशल: संजय लीला भंसाली के सिनेमा के 7 ऐसे महिला किरदार जो मुश्किलों में भी बनाए रखी अपनी शान

International Women's Day 2026
इंटरनेशनल विमेंस डे के मौके पर, फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली की फिल्में इस बात का एक शानदार उदाहरण पेश करती हैं कि कैसे हिंदी सिनेमा महिलाओं को एक दमदार कहानी के केंद्र में रख सकता है। अपने भव्य विजुअल्स और भावनाओं से भरपूर कहानियों के लिए मशहूर भंसाली ने लगातार ऐसी महिलाओं के किरदार लिखे हैं जो न केवल कहानी का हिस्सा हैं, बल्कि अक्सर उसका भावनात्मक और नैतिक आधार भी होती हैं।
 
रानियों और योद्धाओं से लेकर तवायफों और प्रेमियों तक, उनके बनाए महिला किरदार हिम्मत, सम्मान और भरोसे के साथ मुश्किल हालातों का सामना करते हैं। यहाँ भंसाली की फिल्मों की वो सात महिलाएँ हैं, जो अपने-अपने अंदाज में ताकत की मिसाल हैं।
 

पारो – गर्व और भावनात्मक ताकत

'देवदास' में पारो सम्मान और शांत सहनशक्ति का प्रतीक है। दिल टूटने और समाज की उम्मीदों के बावजूद, वह कभी भी अपने आत्म-सम्मान से समझौता नहीं करती। पारो का सफर एक ऐसी महिला की ताकत को दिखाता है जो प्यार तो गहराई से करती है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में अपनी पहचान खोने से इनकार कर देती है।
 

चंद्रमुखी – समाज की बेड़ियों से परे एक बड़ी सोच

'देवदास' में ही, चंद्रमुखी अपने पेशे से जुड़ी रूढ़ियों को चुनौती देती है। अपनी दयालुता, सहानुभूति और भावनात्मक साहस के जरिए, वह कहानी के सबसे यादगार किरदारों में से एक बन जाती है। उसका प्यार निस्वार्थ है, और उसकी गरिमा उस नजरिए को बदल देती है जिससे समाज अक्सर हाशिए पर रहने वाली महिलाओं को देखता है।
 

लीला – निडर और स्वतंत्र

'गोलियों की रासलीला राम-लीला' में लीला का किरदार बहुत ही जोशीला, साहसी और पूरी तरह स्वतंत्र है। वह खानदानी दुश्मनी या पुरानी परंपराओं के आगे झुकने से इनकार कर देती है और अपने दिल की सुनती है। लीला एक ऐसी महिला का चेहरा है जो अपनी बात खुलकर कहती है और अपने फैसलों पर अडिग रहती है, चाहे उसका अंजाम कुछ भी हो।
 

मस्तानी – योद्धा और प्रेमी

'बाजीराव मस्तानी' में मस्तानी को ताकत और अटूट विश्वास वाली महिला के रूप में दिखाया गया है। एक कुशल योद्धा और समर्पित साथी होने के नाते, वह समाज के विरोध और भेदभाव का सामना गजब के साहस के साथ करती है। मस्तानी का किरदार उसकी संवेदनशीलता और उग्र दृढ़ संकल्प के बीच एक खूबसूरत संतुलन बनाता है।
 

काशीबाई – मुश्किलों में गरिमा

'बाजीराव मस्तानी' की ही काशीबाई भावनात्मक मजबूती की मिसाल है। निजी तौर पर दिल टूटने के बावजूद, वह अपनी गरिमा, शालीनता और ताकत को बनाए रखती है। उसका किरदार हमें याद दिलाता है कि खामोशी से सब कुछ सहना भी विद्रोह जितना ही ताकतवर हो सकता है।
 

रानी पद्मावती – साहस और नेतृत्व

'पद्मावत' में पद्मावती शाही ताकत और कभी न डगमगाने वाले साहस का प्रतीक हैं। एक रानी के रूप में, वह बुद्धिमानी और दृढ़ संकल्प के साथ नेतृत्व करती हैं, और बड़े से बड़े खतरे के सामने भी अपने सम्मान और अपनी प्रजा की रक्षा करती हैं। उनका किरदार उस लीडरशिप को दिखाता है जो अटूट विश्वास और बहादुरी पर टिकी है।
 

गंगूबाई – बदलाव से मिली ताकत

'गंगूबाई काठियावाड़ी' में, गंगूबाई का सफर बदलाव और सशक्तिकरण की एक मिसाल है। धोखे और शोषण से उबरकर, वह अपने समाज के भीतर सम्मान और अधिकारों की वकालत करने वाली एक दमदार आवाज बनती है। उसकी कहानी विपरीत हालातों में भी डटे रहने और अपनी जिंदगी की कहानी खुद लिखने की ताकत का सबूत है।
 
संजय लीला भंसाली की फिल्मों में महिलाएं सिर्फ किरदार नहीं होतीं, बल्कि उनके कई पहलू होते हैं—वो जुनूनी भी हैं और पूरी तरह मानवीय भी। वे समाज की बंदिशों को चुनौती देती हैं, अपनी भावनाओं को खुलकर जीती हैं और अक्सर उन हालातों को ही बदल देती हैं जिनमें वो रहती हैं।
 
भंसाली को आज राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे दिग्गजों की कतार में खड़ा माना जाता है। अपनी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय कहानियों को उनके सबसे असली और भव्य रूप में पेश करने का एक नया पैमाना तय किया है। भारतीय मनोरंजन जगत की एक बड़ी ताकत के रूप में, भंसाली ने देसी सिनेमा को ग्लोबल स्टेज तक पहुंचाया है। 
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