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इम्तियाज अली को नयापन लाना होगा

रॉक स्टार
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इम्तियाज अली में यश चोपड़ा का भी कुछ अंश है और कुछ अंश है उनमें संजय लीला भंसाली का। प्रेम की तीव्रता, उसका अनूठापन, भव्यता और गहराई... इन सब पर इम्तियाज की पकड़ है। मगर इसके बावजूद उनकी फिल्मों की बुनावट अनुराग कश्यप की तरह महीन और सुलझी हुई नहीं है।

अनुराग कश्यप ने "रॉकस्टार" की जमकर तारीफ की है, मगर यह तारीफ उनकी विनम्रता ही है। खुद अनुराग कश्यप ने तरह-तरह की फिल्में बनाई हैं और सभी में अपनी एक छाप छोड़ी है। इम्तियाज अली अभी एक दायरे में हैं।

वही लड़का-लड़की का मिलना और प्यार न करने के संकल्प के बावजूद प्यार करने लगना। इस एक सिचुएशन को वे लगभग हर फिल्म में फिल्मा चुके हैं। इसे वे और कितनी बार दोहरा सकते हैं। अच्छा डायरेक्टर बनने के लिए उन्हें और तरह की फिल्में भी बनानी पड़ेंगी।

बेशक वे प्रेम कहानियों में ही डील करते रहें, पर प्रेम कहानियों में भी विविधता होनी चाहिए। यशराज और उनके कैंप की हर लव स्टोरी अलग होती है। इधर इम्तियाज अली ने एक ही जैसी चार फिल्में दी हैं। लगता है कि वे एक ही कहानी को चौथी बार सुना रहे हैं।

इस बार उन्होंने कहानी में नयापन लाने के लिए एक मामूली गाने वाले को संगीत सितारा बनते दिखाया है, मगर मूल कहानी का इससे क्या संबंध है? नायक एक दुकानदार होता तो उसकी प्रेम कहानी पर क्या फर्क पड़ना था और टूरिंग सेल्समैन होता तो क्या अंतर आ जाना था?

यदि "रॉकस्टार" एक प्रेमकथा है तो इसका नाम रॉकस्टार नहीं "एक रॉकस्टार की लव स्टोरी" होना चाहिए था। इम्तियाज अली अपनी जगह पर अच्छे डायरेक्टर हैं, पर इतने अच्छे भी नहीं हैं कि उन्हें अनुराग कश्यप की ऐसी तारीफ मिले। हो न हो या तो यह तारीफ अति विनम्रता के कारण है या फिर इसके पीछे कुछ और है।

"रॉकस्टार" से इम्तियाज अली की साख थोड़ी-सी कम हो जाएगी, जिस तरह घाटा न होने के बावजूद शाहरुख खान की हुई है। उन पर दबाव होगा कि अब वे और तरह की स्टोरी पर काम करें। मगर रणबीर कपूर को इस फिल्म से बहुत फायदा होगा। उनका काम बेजोड़ है। उन्होंने अपनी किसी फिल्म में इतनी अच्छी एक्टिंग नहीं की है, जितनी इस फिल्म में उनसे हो गई है।

मासूम अपरिपक्व लड़के से चिड़चिड़े हिंसक सेलिब्रेटी तक बहुत से भावों को उन्होंने बहुत खूबी और भरोसे के साथ अभिव्यक्त किया है। प्रेम की कोमलता भी उन्होंने सजीव की है और प्रेम की शांत नदी में आए कामुकता के तूफान को भी साकार किया है। इस फिल्म में उन्होंने इतना कुछ किया है कि किसी और के लिए कुछ छोड़ा ही नहीं है।

यदि यह फिल्म लोगों को रुच रही है, तो इसमें रणबीर की एक्टिंग का बड़ा कमाल है, वरना इम्तियाज ने फिल्म बहुत लंबी कर दी है। इस फिल्म की कमाई यही है कि रणबीर कपूर के फैन निराश नहीं होते। मगर दिक्कत यह है कि इम्तियाज अली के फैन होते हैं।
लेखक के बारे में
दीपक असीम