osama reward | कौन बनेगा करोड़पति?
- जुबैर अहमद (वॉशिंगटन)
अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन का सही पता और ठिकाना बताने वालों के लिए लगभग पौने तीन करोड़ डॉलर के पुरस्कार की घोषणा कर रखी थी। तो इस पुरस्कार का हक़दार कौन होगा? किसे मिलेगी इतनी बड़ी राशि?
इसका फैसला अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को करना है। लेकिन पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
उनका कहना था, 'इंसाफ के लिए पुरस्कार कार्यक्रम के तहत गोपनीयता की अहमियत को देखते हुए मैं यह नहीं बता सकती कि इस केस में (बिन लादेन के मामले में) या किसी और केस में किस को पुरस्कार के लिए चुना गया है।'
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 1984 में 'न्याय के लिए पुरस्कार कार्यक्रम' की शुरुआत की थी। इसके तहत इनाम पाने के लिए यह जरूरी है कि दी गई जानकारी से अपराधियों या आतंकवादियों की गिरफ्तारी हो सके। बिन लादेन के मामले में यह कहना मुश्किल है कि किसी एक व्यक्ति की सूचना से उनके ठिकाने का पता चला।
सालों की मेहनत : आतंक विरोधी मामलों में राष्ट्रपति के सलाहकार जॉन ब्रेनन के अनुसार बिन लादेन का सुराग सालों की मेहनत का फल था जिस में सीआईए के कई एजेंटों का योगदान है।
लेकिन सवाल यह पैदा होता है की सीआईए को ये अहम जानकारी किस ने दी जिससे बिन लादेन के ठिकाने का पता चला?
दो नाम सामने आते हैं-खालिद शेख मोहम्मद और अबू फराज अल लिबी। ये दोनों बिन लादेन के करीबी साथी थे और संभवत: उन्होंने अपनी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान कुछ ऐसी जानकारियां दी जिनसे बिन लादेन का सुराग मिला।
खालिद ने कई साल पहले पूछताछ के दौरान सीआईए को बिन लादेन के दो ऐसे भरोसेमंद लोगों के पुकार के नाम दिए थे जो बिन लादेन के खास थे। सीआईए ने पिछले साल अगस्त में इनमें से एक का असली नाम हासिल कर लिया।
अधिकारियों का कहना है कि उसके एक फोन को टैप करने से पता चला कि बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद शहर के किस घर में रह रहे थे। इस दौरान अबू लिबी ने भी सीआईए की हिरासत में बिन लादेन के इस भरोसेमंद आदमी की जानकारी दी थी जिससे उसकी पहचान करने में आसानी हुई।
अधिकारियों ने बताया है कि एक बार इस आदमी ने फोन पर कुछ ऐसी बातें कहीं जिनसे साफ हो गया कि बिन लादेन उसी घर में हैं। लेकिन अगर बिन लादेन तक पहुंचाने में परोक्ष रूप से कोई जिम्मेदार है तो वो है बिन लादेन का भरोसेमंद आदमी जो इस अभियान में बिन लादेन के साथ मारा गया। इसके बाद खालिद और अबू लिबी।
लेकिन अमेरिकी प्रशासन को यकीन है कि अगर इस इनाम का कोई सही हकदार है तो वो है सीआईए। उन्हें पुरस्कार के पैसे तो नहीं मिलेंगे लेकिन प्रशंसा जरूर मिल रही है। और लगता यही है कि शायद विदेश मंत्री क्लिंटन अमेरिका के पौने तीन करोड़ डॉलर बचाने में कामयाब हो जाएंगी।
BBC
इसका फैसला अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को करना है। लेकिन पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
उनका कहना था, 'इंसाफ के लिए पुरस्कार कार्यक्रम के तहत गोपनीयता की अहमियत को देखते हुए मैं यह नहीं बता सकती कि इस केस में (बिन लादेन के मामले में) या किसी और केस में किस को पुरस्कार के लिए चुना गया है।'
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 1984 में 'न्याय के लिए पुरस्कार कार्यक्रम' की शुरुआत की थी। इसके तहत इनाम पाने के लिए यह जरूरी है कि दी गई जानकारी से अपराधियों या आतंकवादियों की गिरफ्तारी हो सके। बिन लादेन के मामले में यह कहना मुश्किल है कि किसी एक व्यक्ति की सूचना से उनके ठिकाने का पता चला।
सालों की मेहनत : आतंक विरोधी मामलों में राष्ट्रपति के सलाहकार जॉन ब्रेनन के अनुसार बिन लादेन का सुराग सालों की मेहनत का फल था जिस में सीआईए के कई एजेंटों का योगदान है।
लेकिन सवाल यह पैदा होता है की सीआईए को ये अहम जानकारी किस ने दी जिससे बिन लादेन के ठिकाने का पता चला?
दो नाम सामने आते हैं-खालिद शेख मोहम्मद और अबू फराज अल लिबी। ये दोनों बिन लादेन के करीबी साथी थे और संभवत: उन्होंने अपनी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान कुछ ऐसी जानकारियां दी जिनसे बिन लादेन का सुराग मिला।
खालिद ने कई साल पहले पूछताछ के दौरान सीआईए को बिन लादेन के दो ऐसे भरोसेमंद लोगों के पुकार के नाम दिए थे जो बिन लादेन के खास थे। सीआईए ने पिछले साल अगस्त में इनमें से एक का असली नाम हासिल कर लिया।
अधिकारियों का कहना है कि उसके एक फोन को टैप करने से पता चला कि बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद शहर के किस घर में रह रहे थे। इस दौरान अबू लिबी ने भी सीआईए की हिरासत में बिन लादेन के इस भरोसेमंद आदमी की जानकारी दी थी जिससे उसकी पहचान करने में आसानी हुई।
अधिकारियों ने बताया है कि एक बार इस आदमी ने फोन पर कुछ ऐसी बातें कहीं जिनसे साफ हो गया कि बिन लादेन उसी घर में हैं। लेकिन अगर बिन लादेन तक पहुंचाने में परोक्ष रूप से कोई जिम्मेदार है तो वो है बिन लादेन का भरोसेमंद आदमी जो इस अभियान में बिन लादेन के साथ मारा गया। इसके बाद खालिद और अबू लिबी।
लेकिन अमेरिकी प्रशासन को यकीन है कि अगर इस इनाम का कोई सही हकदार है तो वो है सीआईए। उन्हें पुरस्कार के पैसे तो नहीं मिलेंगे लेकिन प्रशंसा जरूर मिल रही है। और लगता यही है कि शायद विदेश मंत्री क्लिंटन अमेरिका के पौने तीन करोड़ डॉलर बचाने में कामयाब हो जाएंगी।
