कोरोना वायरस से मौत होने पर शव से कितना ख़तरा?

पुनः संशोधित बुधवार, 18 मार्च 2020 (17:56 IST)
(virus) के संक्रमण से किसी की मृत्यु होने के बाद उसके शव का प्रबंधन कैसे किया जाए और क्या सावधानियां बरती जाएं, इस बारे में भारत के ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

हाल ही में राजधानी दिल्ली में एक बुज़ुर्ग महिला की COVID-19 के कारण मृत्यु होने के बाद लोगों में यह भ्रम देखने को मिला था कि उनके शव के अंतिम संस्कार से भी संक्रमण फैल सकता है। हालांकि इस घटना के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने यह दावा किया कि शव के अंतिम संस्कार से कोरोना वायरस नहीं फैलता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के दख़ल के बाद चिकित्सकों की एक टीम की निगरानी में महिला का अंतिम संस्कार किया गया था।

इस पूरे मामले को देखते हुए ही ने नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (एनसीडीसी) की मदद से ये दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनसीडीसी के हवाले से कहा कि जिस तरह की गाइडलाइन निपाह वायरस के संक्रमण के समय जारी की गई थीं, COVID-19 के लिए उन्हीं में कुछ बदलाव किए गए हैं।

चूंकि COVID-19 एक नई बीमारी है और वैज्ञानिकों के पास फ़िलहाल इसकी सीमित समझ है। इसलिए महामारियों से संबंधित जो समझ अब तक हमारे पास है, उसी के आधार पर ये गाइडलाइंस तैयार की गई हैं।

क्या हैं गाइडलाइंस : दिशा-निर्देश में इस बात पर बहुत ज़ोर दिया गया है कि COVID-19 हवा से नहीं फैलता, बल्कि बारीक कणों के ज़रिए फैलता है। मेडिकल स्टाफ़ से कहा गया है कि वो COVID-19 के संक्रमण से मरे व्यक्ति के शव को वॉर्ड या आइसोलेशन रूम से नीचे लिखी गईं सावधानियों के साथ ही शिफ़्ट करें :

शव को हटाते समय पीपीई का प्रयोग करें। पीपीई एक तरह का 'मेडिकल सूट' है जिसमें मेडिकल स्टाफ़ को बड़ा चश्मा, एन95 मास्क, दस्ताने और ऐसा एप्रन पहनने का परामर्श दिया जाता है जिसके भीतर पानी ना जा सके।
मरीज़ के शरीर में लगीं सभी ट्यूब बड़ी सावधानी से हटाई जाएं।

शव के किसी हिस्से में घाव हो या ख़ून के रिसाव की आशंका हो तो उसे ढंका जाए। मेडिकल स्टाफ़ यह सुनिश्चित करे कि शव से किसी तरह का तरल पदार्थ ना रिसे। शव को प्लास्टिक के लीक-प्रूफ़ बैग में रखा जाए। उस बैग को एक प्रतिशत हाइपोक्लोराइट की मदद से
कीटाणुरहित बनाया जाए। इसके बाद ही शव को परिवार द्वारा दी गई सफेद चादर में लपेटा जाए।

केवल परिवार के लोगों को ही COVID-19 के संक्रमण से मरे व्यक्ति का शव दिया जाए। कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के इलाज में इस्तेमाल हुईं ट्यूब और अन्य मेडिकल उपकरण, शव को ले जाने में इस्तेमाल हुए बैग और चादरें, सभी को नष्ट करना ज़रूरी है। मेडिकल स्टाफ़ को यह दिशा-निर्देश मिले हैं कि वे मृतक के परिवार को भी ज़रूरी जानकारियां दें और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए काम करें।

शवगृह से जुड़ी गाइडलाइंस : भारत सरकार के अनुसार COVID-19 से संक्रमित शव को ऐसे चेंबर में रखा जाए जिसका तापमान क़रीब 4 डिग्री सेल्सियस हो। शवगृह को साफ़ रखा जाए और फ़र्श पर तरल पदार्थ ना हो। COVID-19 से संक्रमित शव की एम्बामिंग पर रोक है यानी के बाद शव को सुरक्षित रखने के लिए उस पर कोई लेप नहीं लगाया जा सकता।

कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति की ऑटोप्सी यानी शव परीक्षा भी बहुत ज़रूरी होने पर ही की जाए। शवगृह से COVID-19 शव निकाले जाने के बाद सभी दरवाज़े, फ़र्श और ट्रॉली सोडियम हाइपोक्लोराइट से साफ़ किए जाएं।

शव को ले जाने वालों के लिए : सही तरीक़े से यानी प्लास्टिक बैग और चादर में बंद किए गए शव को ले जाने वालों को कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन जिस वाहन को ऐसा शव ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाए, उसे भी रोगाणुओं से मुक्त करने वाले द्रव्य से साफ़ करना ज़रूरी है।

अंत्येष्टि या दफ़न करने से संबंधित गाइडलाइंस : अंतिम संस्कार की जगह को और क़ब्रिस्तान को संवेदनशील जगह मानें। भीड़ को जमा ना होने दें, ताकि कोरोना वायरस के ख़तरे को कम रखा जा सके। परिवार के अनुरोध पर मेडिकल स्टाफ़ के लोग अंतिम दर्शन के लिए मृतक का चेहरा प्लास्टिक बैग खोलकर दिखा सकते हैं, पर इसके लिए भी सारी सावधानियां बरती जाएं।

अंतिम संस्कार से जुड़ीं सिर्फ़ उन्हीं धार्मिक क्रियाओं की अनुमति होगी जिनमें शव को छुआ ना जाता हो। शव को नहलाने, चूमने, गले लगाने या उसके क़रीब जाने की अनुमति नहीं होगी। शव दहन से उठने वाली राख से कोई ख़तरा नहीं है। अंतिम क्रियाओं के लिए मानव-भस्म को एकत्र करने में कोई ख़तरा नहीं है।

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