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Written By BBC Hindi
Last Modified: रविवार, 5 अप्रैल 2020 (11:30 IST)

कोरोना वायरस: जयपुर की वो जगह जहां रहते हैं शहर के 60 फ़ीसदी संक्रमित मरीज़

कोरोना वायरस: जयपुर की वो जगह जहां रहते हैं शहर के 60 फ़ीसदी संक्रमित मरीज़ - Ramganj in Jaipur
मोहर सिंह मीणा, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में 5 अप्रैल सुबह 9 बजे तक कोरोना वायरस के 210 पॉज़िटिव मामलों में अकेले जयपुर से 56 पॉज़िटिव मामले मिल चुके हैं। लेकिन इनमें से ज़्यादातर मामले रामगंज में हैं। सड़कें सूनसान पड़ी हैं और बाज़ार बंद हैं। आसमान में परिंदों की जगह ड्रोन नज़र आ रहे हैं। रामगंज से पहला कोरोना पॉज़िटिव मामला यहां की रहमानिया मस्जिद के पास से मिला था।
 
यहां रहने वाला युवक 12 मार्च को ओमान से आया जिसे लक्षण दिखने पर 25 मार्च को अस्पताल में भर्ती किया गया। 26 मार्च को कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आने पर इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया गया। यही इस 
 
इलाक़े का पहला पॉज़िटिव मामला था, लेकिन क़रीब 3 किलोमीटर के इस एरिया में 4 अप्रैल तक 3 पॉज़िटिव मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ओमान से जयपुर आने और अस्पताल में भर्ती होने तक वह कई 
 
परिचितों और मित्रों से मिला, जो अधिकतर पॉज़िटिव पाए गए हैं।
 
आदर्श नगर से विधायक आरिफ़ ख़ान बीबीसी को बताते हैं, ‘मेरी उस शख़्स से हर रोज़ बात होती है। वही शख़्स जो रामगंज का पहला पॉज़िटिव शख्स है। वो कहता है कि मुझे पहले दिन से ही कुछ बीमारी फ़ील 
 
नहीं हो रही है, यदि फ़ील होती तो मैं ओमान से आकर यूं घूमता नहीं। अपने बच्चों और अपने परिचितों के साथ खिलवाड़ नहीं करता।‘
 
रामगंज में दिहाड़ी मज़दूरों की बड़ी आबादी है। लेकिन अब कर्फ़्यू और लॉकडाउन के कारण उनके सामने सबसे बड़ी समस्या खाने की है। नाम का ज़िक्र नहीं करने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी कहते हैं कि लोगों 
 
में पहले कोरोना वायरस को लेकर ज़्यादा सजगता नहीं दिखाई दे रही थी, लेकिन अब बड़ी संख्या में पॉज़िटिव मामले से लोग घरों से ख़ुद ही बाहर नहीं निकल रहे हैं।
 
रामगंज निवासी शौकीन ख़ान बताते हैं कि मेडिकल टीम तो ज़रूर पूछताछ करने आई है। लेकिन राशन के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यहां बड़ी संख्या में रोज़ कमाकर खाने वाला मज़दूर वर्ग है। लेकिन अब 
 
ऐसे हालात में भूख से परेशान हैं और कम जगह में अधिक लोगों के रहने से भी यहां परेशानियां बहुत हो गई हैं।
पुलिस के सामने कैसी चुनौतियां?
 
जयपुर कलेक्टर जोगाराम यहां की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन को किसी बात के भय और चुनौती होने के सवाल पर बीबीसी को बताते हैं कि बाकी कर्फ़्यू और इस कर्फ़्यू में फ़र्क है। यह हेल्थ को लेकर है। 
 
बहुत कंजस्टेड एरिया है और घर पास-पास में हैं। इसलिए बाकी जगह से यहां थोड़ा चैलेंजिंग है।
 
वो कहते हैं, "सील होने से रामगंज में लोगों के घरों तक सामान पहुंचने का मुद्दा है। इसलिए हमने डोर टू डोर सप्लाई की व्यवस्था की है जिससे लोगों को बाहर न निकलना पड़े।"
 
विधायक रफ़ीक ख़ान कहते हैं कि अभी हमारे सामने दो चैलेंज हैं, एक तो कोरोना वायरस के इन्फ़ेक्शन से लोगों को बचाना है और दूसरा चैलेंज फ़ूड सप्लाई देनी है। वो कहते हैं कि अब चुनौती ये है कि जिन लोगों 
 
के पास राशन कार्ड नहीं है, उनको राशन कैसे दें, लोगों को मुफ़्त में डबल राशन देने की व्यवस्था की है, फ़ूड पैकेट भी बांट रहे हैं।
 
स्थानीय लोग मेडिकल टीम को सपोर्ट कर रहे हैं क्या?
इस सवाल पर जयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नरोत्तम शर्मा कहते हैं, "अभी कुछ लोग हैं जो घर को लॉक कर देते हैं और जवाब नहीं देते हैं। धीरे-धीरे लोगों में समझदारी आएगी। लेकिन पुलिस का समर्थन मिलने के बाद हमें बहुत सफलता मिली है।"
 
रामगंज थानधिकारी बनवारी लाल कहते हैं, "संवेनशीलता को देखते हुए पूरा बंदोबस्त है। मेडिकल टीम के साथ बदतमीज़ी करने वाले शख़्स को अरेस्ट किया है। रामगंज के कर्फ़्यू को लेकर सोशल मीडिया पर  3 युवक गिरफ्तार किए हैं। अफ़वाहों को रोकना भी एक चुनौती है।"

अफ़वाह फैलाने वाले मस्जिदों में ताला, घरों में पढ़ रहे नमाज़
रामगंज में क़रीब 25 छोटे छोटे मोहल्ले हैं। इनमें हर मोहल्ले में मस्जिद है लेकिन इन दिनों कोरोना का ख़ौफ़ लोगों के दिलों में घर कर गया है। लोग दहशत में हैं और प्रशासन की सख़्ती ने धार्मिक स्थानों पर नमाज़ अदा करने से मना कर दिया है।
 
कोरोना वायरस का ख़ौफ़ और प्रशासन की सख़्ती के बाद लोग घरों में ही नमाज़ अदा कर रहे हैं। छोटे छोटे घरों में रहने वालों की बड़ी संख्या है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का ख़याल रखते हुए रामगंज में अब घरों में, छतों पर और कमरों में ही नमाज़ पढ़ रहे हैं।
 
27 अप्रैल से रोज़े शुरू हो रहे हैं जिसका इंतज़ार लोग साल भर करते हैं। लेकिन इस बार रोज़े और ईद का उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है।
 
इन दिनों रामगंज के बाज़ारों में रौनक हुआ करती थी, रोज़ों की तैयारियां शुरू हो जाती थीं लेकिन इस बार बच्चों को भी अपनी ईदी नहीं मिलती सी दिख रही है। 
 
कैसा है जयपुर का रामगंज
वरिष्ठ पत्रकार ईशमधु तलवार बताते हैं कि रामगंज ने हसरत जयपुरी और शमीम जयपुरी जैसे बड़े-बड़े शायर दिए हैं। वो कहते हैं कि ग़ालिब के छोटे भाई आरिफ़ का ससुराल भी यहीं है।
 
दिल्ली के बल्लीमारान और कटला की तरह ही संकरी गलियों और यहां के बाज़ार जैसा ही माहौल रामगंज में भी नजर आता है।
 
जयपुर का सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व रामगंज में ही है, जो सड़कों पर लोगों की भीड़ देखकर ही लगाया जा सकता है।
 
रामगंज के ही जानकार बताते हैं कि अधिकतर आबादी यहां रहमानिया मुसलमानों की है। ज़्यादातर लोग जूते-चप्पल बनाने के काम से जुड़े हुए हैं। जबकि घरों में महिलाएं और बच्चे नगीनों का भी काम करते हैं।
 
रामगंज थानाधिकारी बनवारी लाल बताते हैं, "रामगंज में जनघनत्व बहुत ज्यादा है। एक मकान में 100 से 150 लोग रहते हैं।"
 
यहां लोग नगीनों को बेचने के लिए कई देशों में जाते हैं। यहां से मिला पहला कोरोना पॉज़िटिव शख़्स भी नगीनों के व्यापार संबंध में ही ओमान गया था। पुरानी दिल्ली की तरह ही यहां खाने के मश्हूर होटल हैं, जहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती हैं।
 
रामगंज में सख़्ती
 
रामगंज में लगातार बढ़ रहे कोरोना पॉज़िटिव मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सरकार का पूरा अमला यहां सख़्ती के साथ ही बेहद चौकन्ना भी है।
 
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के अडिश्नल पुलिस कमिश्नर अजय पाल लांबा बताते हैं कि पूरे परकोटे में कर्फ्यू के लिए पर्याप्त पुलिस प्रबंध हैं, घरों से बाहर किसी को निकलने नहीं दिया जा रहा है।
 
वो कहते हैं कि कर्फ़्यू एरिया में 15 ड्रोन से निगरानी की जा रही है यहां कि तंग गलियों में किसी के नज़र आने पर पुलिस कार्रवाई करती है, छतों पर बैठे लोगों के नज़र आते ही उन्हें हटाने का काम कर रहे हैं।
 
यहां से आने या जाने पर पूरी तरह पाबंदी है और पहले जारी कई कर्फ़्यू पास भी अमान्य कर दिए हैं। परकोटे में प्रवेश करने या बाहर जाने वालों के वाहनों तक को सेनेटाइज तक किया जा रहा है।
 
अतिरिक्त आयुक्त लांबा आगे कहते हैं, "लोग बहुत सपोर्ट कर रहे हैं। जयपुर शहर में अगर सबसे ज़्यादा सपोर्टिव लोग हैं तो वो रामगंज इलाक़े के ही लोग हैं इस समय। परकोटे से बाहर शहर के अन्य इलाक़ों में 
 
लोग दवाई और राशन के नाम पर बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, लेकिन परकोटे में कोई बाहर नहीं निकल रहा है।"
 
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