सम्बंधित जानकारी
- 'सबके राम, सब में राम' की भावना को स्थापित करने से बनेगा 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत'
- घर में राम जी की मूर्ति स्थापना करने के पहले जान लें नियम
- रामायण के राम को नहीं हुए अयोध्या में रामलला के दर्शन, बोले- सपना तो पूरा हो गया लेकिन...
- Ram Mandir Ayodhya: रामलला के दर्शन के लिए लगा भक्तों का तांता, 3 लाख ने किए दर्शन
- अयोध्या में रामलला को पहले दिन कितना आया चढ़ावा, जानकर चौंक जाएंगे
Ayodhya Ram Mandir : रामलला के दर्शन के लिए लगी भारी भीड़, महाराष्ट्र से बंगाल तक के श्रद्धालु हुए शामिल
Ayodhya Ram Mandir : महाराष्ट्र से आया दोस्तों का समूह, कोलकाता के तीन सहयोगी और अपने 3 महीने के लंगूर 'बजरंगबली' के साथ ओडिशा से आए संत दंपति उन लोगों में शामिल हैं, जो पहली बार अयोध्या आए हैं। इन सभी का एक ही लक्ष्य था- जनता के लिए राम मंदिर को खोले जाने के बाद पहले ही दिन रामलला के दर्शन करना।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद भव्य मंदिर के कपाट मंगलवार सुबह आम लोगों के लिए खोल दिए गए। राम मंदिर और जय श्री राम लिखी विशेष कमीज पहने पलाश थांगे और उनके दोस्त मयूर भोर महाराष्ट्र के एक अन्य दोस्त के साथ सुबह हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंचे।
थांगे ने बताया, हम अहमदनगर से आए हैं और अयोध्या की यह हमारी पहली यात्रा है। राम मंदिर को देखना मेरा सपना था और हम दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन भीड़ बहुत अधिक है। भोर ने कहा, हमारे शहर में भगवान हनुमान का बेहद पुराना एक मंदिर है। अयोध्या आना हमारे के लिए एक आशीर्वाद है।
छत्तीसगढ़ के सुरेश कुमार और उनके दोस्त भी यहां पहली बार आए हैं। उन्होंने कहा कि वे दर्शन करने के लिए काफी उत्सुक हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर कतार में खड़े सुरेश ने कहा, हम दुर्ग से आए हैं। हम पहले कानपुर तक ट्रेन से आए और फिर वहां से लखनऊ बस से पहुंचे। लखनऊ से दूसरी बस से सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अयोध्या पहुंचे।
ALSO READ: प्राण-प्रतिष्ठा के बाद क्या बोले अयोध्यावासी
ओडिशा के 70 वर्षीय चतुर सागर अपनी पत्नी हीरावती सागर और एक खास लंगूर के साथ यहां पहुंचे हैं। हीरावती ने कहा, लंगूर की उम्र सिर्फ तीन महीने है और इसका नाम बजरंगबली है। हम मथुरा में दर्शन करने के बाद अयोध्या आए हैं। अगर हम यहां मर भी जाएं, तो भी हमें कोई अफसोस नहीं होगा।
संत चतुर ने कहा, अयोध्या प्रभु श्रीराम की नगरी है, हम उनका आशीर्वाद लेने आए हैं। अयोध्या की सड़कों पर मेला जैसा नजारा हैं, क्योंकि यहां जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं। (भाषा)
Edited By : Chetan Gour
Edited By : Chetan Gour











