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कविता : हिन्दी भाषा, सभ्यता की संपदा
भाषा जब सहज बहती, संस्कृति, प्रकृति संग चलती। भाषा-सभ्यता की संपदा, सरल रहती अभिव्यक्ति सर्वदा। -
हिन्दी दिवस कविता : राष्ट्रभाषा की दु:खभरी गाथा
हिन्दी दिवस कविता- क्षेत्रीयता से ग्रस्त है। राजनीति से त्रस्त है।। हिन्दी का होता अपमान। घटता है भारत का मान।। -
हिन्दी भाषा पर कविता : हम सब मिलकर दें सम्मान
कम्प्यूटर के युग के दौर में, थोपी जा रही अंग्रेजी शोर में। आधुनिकता की कहते इसे जान, छीन रहे हैं हिन्दी का रोज मान। -
कविता : हिन्दी ही पहचान हमारी
साहित्य की फुलवारी, सरल-सुबोध पर है भारी। अंग्रेजी से जंग जारी, सम्मान की है अधिकारी। -
पुस्तक समीक्षा : 'आचमन, प्रेम जल से' प्रेमानुभूतियों का समंदर है
'आचमन, प्रेम जल से' काव्य संग्रह की रचनाकार ई. अर्चना नायडू हैं। यह इनका द्वितीय काव्य संग्रह है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं ... -
पुस्तक समीक्षा: 'सफ़र संघर्षों का'
'सफ़र संघर्षों का' काव्य संग्रह प्रथम काव्य 'वह बजाती ढोल' का द्वितीय भाग है जिसमें मां के संघर्ष की व्यथा को शाब्दिक ... -
व्यंग्य : छा गई खिचड़ी...
सोशल मीडिया पर रोज नई-नई खिचड़ी पकती रहती है। अब असल में ही खिचड़ी पकाकर राष्ट्रीय व्यंजन बना दिया गया। पिछले दिनों सोशल ...
