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Short Story About Mother's Day : मातृत्व से बढ़कर कुछ नहीं
रूदन की आवाज जोर जोर से आने लगी। रोने की आवाज से मां के दर्द का एहसास हो रहा था। बरामदे में बैठी महिलाओं की आंखें भी नम ... -
पापा ने हाथ बढ़ा कर मुझे थामा पर मैं उनका हाथ क्यों न थाम सकी
मैं हम चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हूं । पापा का स्नेह और साथ ज्यादा मिला। बात 2003 की जब मैं अपने पापा के साथ द्वारका ... -
हिन्दी कविता : रोक दो टोक दो
रोक दो, टोक दो हर उस इंसान को घूम रहा गलियों में, जो बिना लगाए मास्क को झिझक का बंधन तोड़ दो -
लघुकथा : हिसाब
मिस शालू के ऑफिस में आते ही सबकी निगाहें उन पर टिक गई। इठलाती, झूमती, कुछ बहकी सी, आंखों में अजीब-सा लालपन लिए सभी ... -
लघुकथा : पुण्य लाभ
काकी आज बहुत खिन्न नजर आ रही थी। पड़ोस में रहने वाली अनुष्का से रहा नहीं गया। वह पूछ बैठी- काकी क्या हुआ? आपको कभी ऐसे ...
