बृहस्पति (गुरु) का गोचर ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह एक राशि में लगभग 12 से 13 महीने तक रहते हैं। गुरु को भाग्य, संतान, धन, धर्म और ज्ञान का कारक माना जाता है। साल 2026 में गुरु का गोचर बहुत ही खास है क्योंकि वे अपनी उच्च राशि (Exalted Sign) में प्रवेश करेंगे।
2026 में गुरु (Jupiter) का गोचर काल
1. मिथुन राशि में गोचर: साल 2026 की शुरुआत में गुरु मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे। वर्ष की शुरुआत से लेकर 2 जून 2026 तक बृहस्पति का मिथुन राशि में रहना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. कर्क राशि में गोचर (बड़ा बदलाव): 2 जून 2026 को गुरु मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करेंगे।
3. गुरु का सिंह राशि में गोचर (31 अक्टूबर 2026): सिंह राशि सूर्य की राशि है और गुरु के मित्र की राशि है। गुरु का यहाँ आना 'अग्नि तत्व' और 'ज्ञान' का मेल कराता है।
12 राशियों पर मुख्य प्रभाव (मिथुन गोचर के दौरान)
मेष: शुभ छोटी यात्राओं से लाभ, भाई-बहनों से सहयोग और साहस में वृद्धि।
वृषभ: (अति शुभ) धन लाभ के प्रबल योग, वाणी में मधुरता और परिवार में वृद्धि।
मिथुन: (अति शुभ) गुरु आपकी ही राशि में हैं; आत्मविश्वास बढ़ेगा, मान-सम्मान और नई पहचान मिलेगी।
कर्क: (सावधान) आध्यात्मिक कार्यों पर खर्च, विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
सिंह: (शुभ) आय में जबरदस्त बढ़ोतरी, बड़े भाइयों और मित्रों का सहयोग, इच्छाओं की पूर्ति।
कन्या: (मिश्रित) कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव, जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, घर-परिवार पर ध्यान देना होगा।
तुला: (अति शुभ) भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, लंबी यात्राएं और धार्मिक कार्यों में सफलता।
वृश्चिक: (सावधान) अचानक धन हानि या लाभ की स्थिति, शोध और गुप्त विद्याओं में रुचि बढ़ेगी।
धनु: (शुभ) वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा, साझेदारी के व्यापार में प्रगति और सुख मिलेगा।
मकर: (मिश्रित) शत्रुओं पर विजय मिलेगी, लेकिन कर्ज और स्वास्थ्य के मामलों में सतर्क रहें।
कुंभ: (अति शुभ) संतान सुख, शिक्षा में बड़ी सफलता और प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता।
मीन: (शुभ) भूमि-भवन का सुख, माता का आशीर्वाद और घर में सुख-शांति का माहौल।
12 राशियों पर मुख्य प्रभाव (कर्क में गोचर के बाद)
1. अति शुभ (Exalted): कर्क, वृश्चिक और मीन के लिए भाग्य का पूरा साथ, धन लाभ, विवाह के योग और आध्यात्मिक उन्नति।
2. करियर में उन्नति: मेष, तुला और मकर के लिए समाज में मान-सम्मान, नौकरी में प्रमोशन और नया व्यापार शुरू करने के लिए उत्तम।
3. ज्ञान और शिक्षा: मिथुन, कन्या, धनु के लिए विद्यार्थियों को बड़ी सफलता, विदेश यात्रा के योग और पारिवारिक सुख।
4. सावधानी/मिश्रित: वृषभ, सिंह, कुंभ के लिए स्वास्थ्य पर ध्यान दें, बड़े निवेश सोच-समझकर करें, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
नोट: कर्क राशि में गुरु सबसे अधिक शक्तिशाली और शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।
गुरु का सिंह राशि में गोचर (31 अक्टूबर 2026)
1. मेष, धनु और सिंह: इन राशियों के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभकारी होगा क्योंकि गुरु का त्रिकोण संबंध बनेगा। संतान सुख और मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
2. मिथुन और तुला: सामाजिक दायरे का विस्तार होगा और लंबी दूरी की यात्राएं फलदायी रहेंगी।
3. वृषभ, वृश्चिक और कुंभ: करियर में नए अवसर मिलेंगे, लेकिन आपको अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा क्योंकि सिंह राशि स्वाभिमान की राशि है।
एक विशेष बात: 2026 के अंत में गुरु जब सिंह राशि में होंगे, तब वे वक्री अवस्था में होंगे, जिससे उनके प्रभाव में और अधिक गहराई आएगी।
गुरु के इस गोचर का विशेष महत्व
हंस पंचमहापुरुष योग: जब गुरु कर्क राशि में गोचर करेंगे, तो कई राशियों के लिए 'हंस योग' का निर्माण होगा, जो व्यक्ति को बुद्धिमान, सुखी और दीर्घायु बनाता है।
उच्च का गुरु: 12 साल बाद गुरु अपनी उच्च राशि में आते हैं। यह समय वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में सुधार और धार्मिक सद्भावना बढ़ने का संकेत देता है।
उपाय: गुरु की शुभता बढ़ाने के लिए गुरुवार को केसर का तिलक लगाएं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और चने की दाल या पीले फलों का दान करें।