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यात्रा से पहले जानें दिशाशूल

क्या होता है दिशाशूल

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 28 जनवरी 2011 (17:56 IST)
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दिशाशूल मूलत: किसी दिशा विशेष में दिन विशेष पर की जाने वाली यात्रा से संबंधित है। अगर किसी कारणवश उक्त दिशा में यात्रा करनी भी पड़े तो उसके निवारण के कुछ आसान से उपाय होते हैं। ‍जिन्हें जानकर यात्रा को निर्विघ्न बानाया जा सकता है।

इसे नीचे दिए गए उदाहरण से समझ सकते हैं :

पूर्व दिशा - सोमवार, शनिवार।

पश्चिम दिशा - रविवार, शुक्रवार।

दक्षिण दिशा - गुरुवार।

उत्तर दिशा - मंगलवार, बुधवार।

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दिशाओं के सामने दिए गए वारों में उक्त दिशा में दिशाशूल होता है। अतः उक्त दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। रविवार, गुरुवार, शुक्रवार के दोष रात्रि में प्रभावित नहीं होते हैं।

सोमवार, मंगलवार, शनिवार के दोष दिन में प्रभावी नहीं होते हैं। किंतु बुधवार तो हर प्रकार से त्याज्य है।

अत्यावश्यक होने पर रविवार को पान या घी खाकर, सोमवार को दर्पण देखकर या दूध पीकर, मंगल को गुड़, खाकर, बुधवार को धनिया या तिल खाकर, गुरुवार को जीरा या दही खाकर, शुक्रवार को दही पीकर और शनिवार को अदरक या उड़द खाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

यदि एक दिन में गंतव्य स्थान पर पहुँचना और फिर वापस आना निश्चित हो तो दिशाशूल विचार की आवश्यकता नहीं है।

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