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संधिकाल क्या होता है, इसका रहस्य जान लेंगे तो सुखी बने रहेंगे

Updated: शनिवार, 22 मई 2021 (12:22 IST)
संधिकाल क्या होता है। दरअसल, किसी समय का परिवर्तन काल संधि काल होता है जैसे रात के बाद दिन प्रारंभ होता है, लेकिन दोनों के बीच जो काल होता है उसे संधिकाल कहते हैं। आओ जानते हैं कितने प्रकार के संधिकाल होते हैं।
 
 
'सूर्य और तारों से रहित दिन-रात की संधि को तत्वदर्शी मुनियों ने संध्याकाल माना है।'-आचार भूषण-89
 
1. रात और दिन में मुख्‍यत: दो संधियां तो हम देख सकते हैं जैसे प्रात: काल और संध्याकाल लेकिन बाकी की संधियों का हमें ज्ञान नहीं होता है। दो अवस्थाओं के मिलने का समय संधि काल होता है।
 
2. दिन और रात मिलाकर 8 प्रकार की संधि होती है जिसे अष्ट प्रहर कहते हैं। एक प्रहर एक घटी 24 मिनट की होता है। दिन के चार और रात के चार प्रहर मिलाकर कुल आठ प्रहर हुए। 
 
*दिन के चार प्रहर:- पूर्वान्ह, मध्यान्ह, अपरान्ह और सायंकाल।
*रात के चार प्रहर:- प्रदोष, निशिथ, त्रियामा एवं उषा।
 
3. तो दिन के बीच के समय को संधिकाल कहते हैं।
 
4. दो तिथियों के बीच के समय को संधिकाल कहते हैं।
 
4 . इसके अलावा दो पक्ष के बीच के काल को भी संधिकाल कहते हैं जैसे अमावस्या और पूर्णिमा।
 
5. दो माह के बीच के काल को भी संधिकाल कहते हैं।
 
6. दो ऋतु्तों के बीच के काल को भी संधिकाल कहते हैं।
 
7. दो अनयों अर्थात उत्तरायण और दक्षिणायन के काल को भी संधिकाल कहते हैं।
 
8. दो संवत्सर के बीच के काल को भी संधिकाल कहते हैं। 
 
9. दो युग के बीच के काल को भी संधिकाल कहते हैं।
 
10. जन्म और मृत्यु और मृत्यु और जन्म के बीच के काल को भी संधिकाल कहते हैं।
 
11. दो श्वासों के बीच जो अंतराल है उसे भी संधिकाल कहते हैं।
 
इसी तरह और भी कई तरह की संधियां होती हैं। संधिकाल में ही संध्यावंदन या संध्योपासन का महत्व होता है और जो भी व्यक्ति संधिकाल के महत्व को जानकर उसके नियम मानता है वह हर तरह के संकटों से बचकर सदा सुखी और समृद्ध रहता है।
 
संधिकाल में अनिष्ट शक्तियां प्रबल होने के कारण इस काल में निम्नलिखित बातें निषिद्ध बताई गई हैं:-
 
1.सोना
2.सहवास करना
3.खाना-पीना
4.यात्रा करना
5.असत्य बोलना
6.क्रोध करना
7.शाप देना
8.झगड़े करना
9.गालियां देना या अभद्र बोलना
10.शपथ लेना
11.धन लेना या देना
12.रोना या जोर-जोर से हंसना
13.वेद मंत्रों का पाठ करना
14.कोई शुभ कार्य करना
15.चौखट पर खड़े होना
16.किसी भी प्रकार का शोर-शराब करना
 
उपरोक्त नियम का पालन नहीं करने से जहां एक ओर बरकत चली जाती है वहीं व्यक्ति कई तरह के संकटों से घिर जाता है। संध्या काल में शनि, राहु और केतु के साथ ही शिव के गण सक्रिय रहते हैं।
 
संध्योपासन : संध्या वंदन को संध्योपासना भी कहते हैं। संधि काल में ही संध्या वंदन की जाती है। वैसे संधि पाँच वक्त (समय) की होती है, लेकिन प्रात: काल और संध्‍या काल- उक्त दो समय की संधि प्रमुख है। अर्थात सूर्य उदय और अस्त के समय। इस समय मंदिर या एकांत में शौच, आचमन, प्राणायामादि कर गायत्री छंद से निराकार ईश्वर की प्रार्थना की जाती है।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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