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मिथुन संक्रांति का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कथा

मिथुन संक्रांति का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कथा - Surya Mithun Sankranti
इस वर्ष 15 जून 2021 को सूर्य का मिथुन राशि में गोचर हो रहा है। मंगलवार, 15 जून 2021 को मिथुन संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी तिथि को मिथुन संक्रांति होगी। ज्योतिष के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन संक्रांति कहलाता है। पूरे वर्षभर में 12 संक्रांतियां होती हैं। इनमें से 4 संक्रांति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख हैं। 
 
कथा- प्रकृति ने महिलाओं को मासिक धर्म का वरदान दिया है, इसी वरदान से मातृत्व का सुख मिलता है। मिथुन संक्रांति कथा के अनुसार जिस तरह महिलाओं को मासिक धर्म होता है वैसे ही भूदेवी या धरती मां को शुरुआत के तीन दिनों तक मासिक धर्म हुआ था जिसको धरती के विकास का प्रतीक माना जाता है। तीन दिनों तक भूदेवी मासिक धर्म में रहती हैं वहीं चौथे दिन में भूदेवी जिसे सिलबट्टा भी कहते हैं उन्हें स्नान कराया जाता है। इस दिन धरती माता की पूजा की जाती है। उडीसा के जगन्नाथ मंदिर में आज भी भगवान विष्णु की पत्नी भूदेवी की चांदी की प्रतिमा विराजमान है।
 
15 जून 2021 को मिथुन संक्रांति का मुहूर्त- 
 
सूर्य का मिथुन राशि में गोचर, 15 जून 2021 को सुबह 5:49 मिनट पर होगा और यह इस स्थिति में 16 जुलाई 2021, शाम 4:41 बजे तक रहेगा और इसके बाद यह कर्क राशि में प्रवेश कर जाएगा।
 
मिथुन संक्रांति पूजा विधि-
 
1. मिथुन संक्रांति के दिन सिलबट्टे को भूदेवी के रूप में पूजा जाता है। सिलबट्टे को इस दिन दूध और पानी से स्नान कराया जाता है।
 
2. इसके बाद सिलबट्टे पर चंदन, सिंदूर, फूल व हल्‍दी चढ़ाते हैं।
 
3. मिथुन संक्रांति के दिन पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
 
4.. मिथुन संक्रांति के दिन गुड़, नारियल, चावल के आटे व घी से बनी मिठाई पोड़ा-पीठा बनाया जाता है।
 
5. इस दिन किसी भी रूप में चावल ग्रहण नहीं किए जाते हैं।