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एकदंत संकष्टी चतुर्थी कब है, जानें शुभ योग, पूजन के मुहूर्त, विधि, मंत्र एवं आरती

Updated: बुधवार, 18 मई 2022 (17:15 IST)
इस वर्ष गुरुवार, 19 मई 2022 को संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को एकदंत संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन चंद्रमा की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का विधि-विधान से पूजन किया जाता है तथा इस दिन संतान पाने के इच्छुक दंपति संतान प्राप्ति की कामना से निर्जला व्रत भी रखते हैं। 
 
इस बार चतुर्थी के दिन सुबह से साध्य योग का निर्माण हो रहा है, जो दोपहर 02.58 मिनट तक जारी रहेगा, तत्पश्चात शुभ योग शुरू होगा। पंचांग की मानें तो ये दोनों ही योग पूजा के लिए अतिशुभ फलदायी माने जाते हैं। 
 
एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा के शुभ मुहूर्त-
 
संकष्टी चतुर्थी 19 मई 2022, दिन बुधवार।
 
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का प्रारंभ- ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी बुधवार, 18 मई 2022 की रात्रि 11.36 मिनट से शुरू। 
 
चतुर्थी ति‍थि का समापन - 19 मई 2022, गुरुवार की रात्रि 08.23 मिनट पर। 
उदयातिथि के अनुसार एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत 19 मई 2022 को किया जाएगा। 
 
एकदंत संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि- 
 
- एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले जागें और स्नान करें।
 
- स्वच्छ किए हुए पटिए या चौकी पर भगवान श्री गणेश को विराजित करें।
 
- पूजन के समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
 
- लाल वस्त्र पहन श्री गणेश की पूजा करें।
 
- श्री गणेश को सिंदूर, दूर्वा, गंध, अक्षत, अबीर, गुलाल, सुंगधित फूल, जनेऊ, सुपारी, पान, मौसमी फल व लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। 
 
- भगवान गणेश के आगे धूप, दीप प्रज्वलित करके आरती करें। 
 
- पूजा के बाद इस श्री गणेश मंत्र से पूजन संपन्न करें। 
 
- मंत्र 'ॐ गणेशाय नमः' का जाप करें।
 
- सायंकाल व्रत कथा पढ़ें और चंद्र दर्शन के समय चांद को अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलें। चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। सूर्योदय से प्रारंभ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन और चंद्र को अर्घ्य देने के बाद संपन्न होता है।
 
- अपना व्रत पूरा करने के बाद दान करना ना भूलें।
 
- विशेष मनोकामना हेतु भगवान श्री गणेश को मोदक अथवा लड्‍डू का भोग लगाएं। 
 
चतुर्थी के दिन इस तरह की गई श्री गणेश की पूजा हमें विघ्न और संकटों से बचाकर जीवन को सफल बनाती है तथा हर इच्छा को पूरा करती है। 
 
श्री गणेश के मंत्र जाप से व्यक्ति का भाग्य चमक जाता है और हर कार्य अनुकूल सिद्ध होने लगता है। अत: इस दिन गणेश गायत्री मंत्र तथा श्री गणेश का सबसे प्रिय मंत्र का जाप करना ना भूलें। 
 
पढ़ें मंत्र-
 
- 'ॐ वक्रतुण्डाय हुं।'
- एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
- 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।'
- महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
- 'ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा।'
- गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
 
श्री गणेश का प्रिय मंत्र- 'ॐ गं गणपते नमः' का अधिक से अधिक जाप करें। तथा श्री गणेश चालीसा का पाठ करें।
 
Ganesh Aarti आरती : जय गणेश जय गणेश
 
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय...
 
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय...
 
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय...
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय...
 
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय...

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