Gajkesari Yog : गजकेसरी योग क्या होता है, कुंडली का सबसे बलवान योग कैसे बदलता है भाग्य
Gajkesari Yog
गजकेसरी योग क्या होता है- What is gaj kesari yog?
- गुरु को गज और चंद्र को केसरी कहते हैं। केंद्र भाव में दोनों की युति और दृष्टि संबंध से यह योग बनता है।
- केंद्र भाव यानी कुंडली के 1, 4, 7 और 10वें भाव में गुरु और चंद्र की युति बनना या एक दूसरे के सामने दृष्टि संबंध बनाना।
- यदि चंद्रमा के साथ या चंद्रमा से चतुर्थ भाव में या चंद्रमा के ठीक सामने सप्तम भाव में या चंद्रमा से दशम भाव में देवगुरु बृहस्पति हो तो ये गजकेसरी योग है।
- यदि यह दोनों ग्रह किसी क्रूर ग्रह से संबंध नहीं रखते हों तो कुंडली में गज केसरी राजयोग बनता है।
- अर्थात इन दोनों ग्रहों पर कोई पाप ग्रह या क्रूर ग्रह का प्रभाव ना हो तो गजकेसरी योग की शुभता में कई गुना वृद्धि हो जाती है।
कुंडली का सबसे बलवान योग कैसे बदलता है भाग्य- What is the result of gaj kesari yog?
1. इस योग के बनने से व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन-सम्पदा की कमी नहीं रहती है।
2. गुरु भाग्य को जागृत करता है तो चंद्र जीवन में सुख और शांति प्रदान करता है। इस योग से जातक सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
3. गजकेसरी योग से जातक का भाग्य बहुत बलवान बन जाता है। वह अपने भाग्य के दम पर जीवन में सफल हो जाता है।
4. जातक जीवन में स्त्री सुख, सन्तान सुख, घर, वाहन, पद-प्रतिष्ठा, सेवक आदि में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आती है।
5. वह सफलता के शिखर को छूता है और वह उच्चपद प्राप्त करता है। इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है।
