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Last Updated : शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025 (16:29 IST)

क्या कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी बनेंगी प्रधानमंत्री? क्या कहती है उनकी कुंडली...

क्या प्रियंका बन सकती है पीएम
इंटरनेट से प्राप्ति कुंडली के अनुसार प्रियंका वाड्रा का जन्म 12 जनवरी 1972 को समय शाम को 05 बजकर 05 मिनट पर दिल्ली में हुआ था। इस मान से उनकी चंद्र राशि वृश्चिक और सूर्य राशि धनु है। प्रियंका गांधी का जन्म मिथुन लग्न में हुआ है। उनकी जन्म कुंडली में बृहस्पति स्वराशि होने के साथ ही सप्तम भाव में स्थित है। मंगल दशम भाव है। शुक्र नवम भाव में, शनि बारहवें भाव में राहु अष्टम भाव में, केतु दूसरे भाव में, चंद्रमा छठे भाव में और सप्तम भाव में गुरु के साथ सूर्य और बुध विराजमान हैं।
 
लाल किताब ज्योतिष का मत:
1. शनि: लाल किताब के अनुसार प्रियंका की कुंडली में बारहवें भाव में बैठा शनि सप्तम भाव को खराब कर रहा है। सप्तम भाव में सूर्य, बुध और गुरु विराजमान है। इसके चलते पिता का सुख गया, वैवाहिक जीवन में डिस्टर्ब हो रहा है और यह बुध अर्थात वाणी के फल भी खराब कर रहा है। यहां बैठा शनि कई घर देगा लेकिन वैवाहिक जीवन के सुखी होने की गारंटी नहीं।
 
2. मंगल: लाल किताब के अनुसार दशम भाव का मंगल उच्च का होकर जातक को चीते जैसे बनाता है। यह कुलदीपक की तरह कुल को बचाने वाला मंगल है। यह भले ही पारिवारिक सुख न दें लेकिन पद का सुख जरूर देगा। जातक के शत्रु उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जातक कितनी भी बड़ी मुसीबत में फंस जाएं वह उससे बाहर निकल आएगा। जातक को रोकने वाले उसके अपने ही होंगे। यह मंगल जातक को नेतृत्व क्षमता, संगठन को बनाने और विवादों से निपटने की क्षमता देता है। लाल किताब के अनुसार उनका मंगल प्रधानमंत्री पद के लिए संभावनाओं का संकेत देता है लेकिन जातक सप्तम भाव में बैठे ग्रह उसके जीवन में रुकावट डालने का काम करेंगे। खासकर उनके पति के द्वारा उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। जातक का खुद की कमाई का बहुत बड़ा बंगला होगा।
 
3. केतु: दूसरे भाव में केतु है। दूसरे भाव का गुरु और शुक्र मालिक है। यदि गुरु और शुक्र आफत में है तो केतु खराब होगा। ऐसे में जातक जब बोलने बैठेगा तो उसे पता ही नहीं होगा कि क्या बोल रहा है। उसे बोलना है बस, इसलिए बोलता चला जाएगा। कई बार जातक अच्छा भी बोलता है लेकिन बीच में ऐसी बात बोल जाता है जिससे की उसकी छवि को नुकसान पहुंचता है। केतु के खराब होने के चलते जातक अपने कुलधर्म में विश्वास नहीं करता है।
 
4. शुक्र: लाल किताब के अनुसार भाग्य भाव में शुक्र का होना शुभ नहीं है यह पितृ दोष को निर्मित करता है। बेशक यह लंबी यात्रा और धन का सुख देने के साथ ही संतान का सुख भी देगा लेकिन जातक यदि अपने दादा के धर्म में विश्वास नहीं रखता है और कुलधर्म के विरुद्ध कार्य करता है तो अंत में सबकुछ नष्ट ही होने वाला है। 
 
5. चंद्रमा: छठे भाव में चंद्रमा है जो माता के लिए कष्टकारी माना गया है क्योंकि यहां पर 12वें भाव से शनि की दृष्टि भी चंद्रमा पर है। यानी चंद्रमा पीड़ित है। यह चंद्रमा जीवन में हर तरह की रुकावट पैदा कर सकता है। यदि जातक इसके उपाय कर लेता है तो यह बहुत फायदा दे सकता है। जातक को धर्म के पालन में कोई कोताही नहीं बरतना चाहिए। तीर्थ यात्रा के मौके नहीं चूकना चाहिए अन्यथा शनि से दृष्ट यह चंद्रमा जातक को जेल तक करवा सकता है या फिर तलाक की नौबत पैदा कर सकता है। 
 
6. सूर्य, बुध और बृहस्पति: सप्तम भाव में बृहस्पति को लाल किताब में अच्‍छा नहीं माना गया है। सातवां घर बुध और शुक्र का होता है। शुक्र और गुरु एक दूसरे के शत्रु हैं, अत: यह मिश्रित परिणाम देगा। इस घर के मामले में मिलने वाला अच्छा परिणाम चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है लेकिन प्रियंका की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित है। यहां पर सूर्य और बुध ने मिलकर बुधादित्य योग भी बनाया है। लेकिन यहां पर शनि की टक्कर के चलते अब इस घर का मालिक बुध ही है जो जातक को विपरीत परिस्थिति में भी रिश्ते निभाने के लिए मजबूर कर रहा है।
 
7. राहु: प्रियंका गांधी की कुंडली में आठवें भाव में राहु है जो अचानक से लाभ और हानि देने का काम करता है। आठवें घर का संबंध शनि और मंगल ग्रह से होता है। यदि मंगल ग्रह शुभ हो तथा पहले या आठवें घर में हो अथवा शुभ शनि आठवें घर में हो तो जातक बहुत अमीर होगा। लेकिन राहु अशुभ है तो कड़वा धुवां अर्थात व्यक्ति की बुद्धि पर ताला लगा मानों। जातक धर्म पर कायम है और वफादार है तो अच्छे परिवार से संबंधों का लाभ मिलेगा। नहीं तो जातक अदालती मामलों में बेकार में पैसे खर्च करता रहेगा। पारिवारिक जीवन भी प्रतिकूलता से प्रभावित होता है।
 
निष्कर्ष: लाल किताब के अनुसार प्रियंका गांधी की कुंडली कहती है कि उनके निजी और पारिवारिक जीवन में बहुत संघर्ष है और उनके शत्रु भी कम नहीं है लेकिन उच्च का मंगल सभी तरह की समस्याओं से पार पाना जानता है। हालांकि रुकावट का घर सप्तम भाव ही है जिसने उन्हें राजनीति में मनचाही सफलता देर से दी है और आने वाले समय में यही सप्तम का घर उनके लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। फिर भी उनकी कुंडली में उच्च पद के साथ ही कांग्रेस पार्टी को संजीवनी देने की क्षमता है। जरूरत है कि पार्टी उन्हें संपूर्ण कमान सौंप दें। यदि ऐसा नहीं होता है तो पार्टी को डुबोने वाले उनके अपने डूबो ही रहे हैं।
 
वैदिक ज्योतिष का मत: 
1. प्रियंका गांधी की कुंडली में पारिजात, अमल, काहल और हंस योग बन रहा है। इसमें से हंस योग को पंच महापुरुष योग में से एक माना जाता है जो कि एक राजयोग है। यह योग तब बनता है जबकि कुंडली के केंद्र में स्वराशि का बृहस्पति हो। प्रियंका की कुंडली में सप्तम भाव में बृहस्पति धनु राशि का है। बृहस्पति की मजबूत स्थिति उनके करिश्माई व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।
 
2. भाग्य भाव में कुंभ राशि में शुक्र की स्थिति है। इसका अर्थ है कि प्रियंका गांधी को शुक्र का साथ मिलेगा जो धन, समृद्धि, भोग और विलासिता का ग्रह है, लेकिन लाल किताब में यहां बैठा शुक्र सहित नहीं माना जाता है।  
 
3. बारहवें भाव में शनि का गोचर उनके लिए कड़ी मेहनत, संघर्ष, और राजनीतिक चुनौतियों को जन्म दे रहा है। यह शनि विदेश से संबंध को भी दर्शाता है। भाग्य स्थान को शुक्र का पूरा साथ मिला हुआ है, जो अपने मित्र की राशि में भी है। शनि भी सातवीं दृष्टि से पंचम स्थान को देख रहा है। ग्रहों का यह मेल एक करिश्माई व्यक्तित्व को भी इंगित तो करता है, लेकिन चापलूसों की फौज के कारण उन्हें उचित दिशा नहीं मिल पाएगी। इसी का फायदा उठाकर उनके विरोधी उन्हें विवादों में घसीटने की पूरी कोशिश करेंगे। ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी बन रही है कि आने वाले समय में वर्चस्व को लेकर दोनों भाई-बहन में दूरियां बढ़ सकती हैं। 
 
4. इसके साथ ही बृहस्पति लग्न के स्वामी बुध और तृतीय भाव के स्वामी सूर्य के साथ भी हैं। यह ग्रह स्थिति इशारा करती है कि प्रियंका एक सहज, प्रभावशाली नेता और व्यक्तिगत तौर पर गतिशील हैं, जो अच्छी स्ट्रेटेजी बना सकती हैं। उन्हें भाषण देते वक्त सावधानी रखना जरूरी है। हालांकि उनमें योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार करने संबंधी विचार करने के साथ ही उन्हें लागू करने की क्षमता भी है। 
 
5. हालांकि सप्तम भाव में धनु का सूर्य बृहस्पति और बुध को शक्ति प्रदान कर रहा है। उनके पास बड़ी चीजों को हासिल करने मौका है, लेकिन यही सूर्य वैवाहिक जीवन में कठिनाइयों को जन्म दे रहा है जिसके कारण राजनीतिक प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है।
 
6. प्रियंका गांधी की कुंडली में सबसे स्ट्रांग ग्रह मंगल है। दशम भाव में स्थित मंगल जातक को पराक्रमी, नेतृत्वकर्ता और दुस्साहसी बनाता है। यह मंगल करियर में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उच्च पद के साथ ही आर्थिक लाभ और प्रसिद्धि मिलेगी जो कि मिल ही रही है, लेकिन यही मंगल जातक को अहंकारी बनाकर आंतरिक संघर्ष और रिश्तों में कड़वाहट पैदा करके चुनौतियों में डाल सकता है।
 
7. वर्ष 2024 से उनकी सूर्य की महादशा चल रही है। वर्तमान में यानी 2025 में इसी दशा के अंतर्गत राहु की दशा चल रही है। अप्रैल 2026 से उनके फिर से अच्छे दिन शुरू होंगे जो 1 जनवरी 2027 तक रहेंगे। इस दौरान उन्हें अपनी पोजीशन को स्ट्रांग करना होगा। इसके बाद सूर्य में शनि की अंतर्दशा के चलते क्या होगा यह उनके कर्मों से तय होगा। उनकी कुंडली में राजयोग है लेकिन इतने प्रबल नहीं कि वे प्रधानमंत्री बन सके, क्योंकि उनकी राह में बहुत रोड़े हैं।