भारत के सामने हॉलैंड की मजबूत दीवार

चंडीगढ़ (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 8 फ़रवरी 2009 (18:29 IST)
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भारतीय टीम को अगर सोमवार को यहाँ सेक्टर 42 स्टेडियम में होने वाले चार देशों के पंजाब गोल्ड कप हॉकी टूर्नामेंट के फाइनल में यूरोपीय चैम्पियन को शिकस्त देकर खिताब अपने नाम करना है तो उसके खिलाड़ियों को सब कुछ न्यौछावर करने के अलावा पेनल्टी ॉर्नर पर मौके चूकने से बचना होगा।


संदीपसिंह की अगुवाई वाली भारतीय टीम के पास इस मैच से राष्ट्रीय खेल की खोयी प्रतिष्ठा को वापस लाने का स्वर्णिम मौका होगा। आँकड़ों के हिसाब से हालांकि हॉलैंड का पलड़ा भारी है क्योंकि भारतीय टीम पिछले 13 वर्ष में इस प्रतिद्वंद्वी टीम को शिकस्त नहीं दे पाई है। ने हॉलैंड के खिलाफ पिछली जीत जनवरी 1996 में ओलिम्पिक क्वालीफायर के दौरान दर्ज की थी।
इसके अलावा आसान पेनल्टी कॉर्नर गँवाना भारत के लिए इस टूर्नामेंट में सबसे बड़ी चिंता का विषय रहा है। हालाँकि मेजबान टीम ने इस प्रतियोगिता में सिर्फ एक मैच में ही हार का सामना किया है, लेकिन उन्होंने अधिकतर पेनल्टी कॉर्नर गँवाए हैं।

वहीं दूसरी ओर हॉलैंड को इस टूर्नामेंट में एक भी हार नहीं मिली है और उसने छह मैचों में 14 अंक हासिल किए, जिससे उसके खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरे हैं। उनके लिये सबसे बढ़िया मुकाबला अंतिम लीग मैच रहा, जिसमें उसने कल विश्व चैम्पियन जर्मनी को 7-1 से रौंदा।



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