सँवर रहा है इंदिरा गाँधी हवाई अड्डा

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
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राजधानी में अगले साल अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान विदेशी मेहमानों की संख्या में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी की चुनौती से निपटने के लिए इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अभी से अपनी कमर कसने लगा है।


हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल का निर्माण कर रही कंपनी जीएमआर ने इस समस्या से निपटने के लिए बीजिंग ओलिम्पिक खेलों के ठीक पहले वहाँ नए हवाईअड्डे का निर्माण कार्य पूरा करने वाले चीनी विशेषज्ञों के एक दल को भारत आमंत्रित किया है।

चीनी विशेषज्ञों ने दिल्ली हवाई अड्डे का दौरा करने के बाद पाया कि यहाँ सबसे बड़ी चुनौती अगले 15 महीनों में इस परियोजना को पूरा करने की है।

इस दल के प्रमुख चेन गुओजिंग ने कहा अभी तक लगभग 50 फीसदी निर्माण कार्य ही पूरा किया जा सका है, जबकि परियोजना को मार्च 2010 तक पूरा हो जाना चाहिए।


उन्होंने कहा मुझे इस परियोजना का शिल्प, डिजाइन और कंस्ट्रक्शन भी संतोषजनक लगा, लेकिन काम की रफ्तार में थोड़ी और तेजी लाई जाना चाहिए।
करीब तीन दर्जन हवाई अड्डों के विकास कार्यक्रमों से जुड़े रहे चेन ने कहा जब हम बीजिंग हवाई अड्डे का निर्माण कर रहे थे तो व्यस्ततम दिनों में करीब 50 हजार लोग काम पर लगे रहते थे, जबकि यहाँ अभी व्यस्ततम समय में 25 हजार लोग ही काम कर रहे हैं।

इस हवाई अड्डे की मौजूदा क्षमता सालाना 140 लाख यात्रियों को संभालने की ही है, लेकिन भविष्य में आने वाली चुनौतियों को देखते हुए इसे विस्तारित करने का कार्यक्रम शुरू किया गया था। निर्माण का कुछ हिस्सा पूरा होने पर यह हवाई अड्डा इस साल के अंत तक करीब 260 लाख यात्रियों का भार वहन कर सकेगा।
फिर भी यह 350 लाख यात्रियों के सालाना आवागमन को देखते हुए नाकाफी ही रह जाएगा, लेकिन अगले साल मार्च तक हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद इसकी क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी।

नया टर्मिनल ही 340 लाख यात्रियों का बोझ सहन करने लायक होगा। उस स्थिति में यह अड्डा दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान आने वाले खिलाड़ियों और विदेशी मेहमानों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।



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