स्वर्ण पदक पर है खाड़े की नजर

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 1 सितम्बर 2010 (17:40 IST)
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दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक पर नजर गढ़ाए बैठे भारत के शीर्ष तैराकों में शुमार वीरधवल खाड़े अन्य देशों के तैराकों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उनका मानना है कि इन खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे।


खाड़े राष्ट्रमंडल खेलों में तैराकी की चार स्पर्धाओं 50मी फ्रीस्टाइल, 100 मीटर फ्रीस्टाइल, 50 मीटर बटरफ्लाई और 100 मीटर बटरफ्लाई में हिस्सा लेंगे।

बेंगलूर में तैयारियों में जुटे खाड़े ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हमारी तैयारियाँ अंतिम दौर में हैं। इन खेलों में स्वर्ण पदक जीतना थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन मैं इसके लिए पूरी कोशिश करूँगा।

कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में 29 अगस्त 1991 को जन्में खाड़े का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सभी भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह कई गुना ज्यादा होगा क्योंकि ये खेल भारत में हो रहे हैं।


उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि घरेलू दर्शकों की उपस्थिति से सभी भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा, जिसका असर प्रदर्शन पर भी पड़ेगा।
इन खेलों के टेस्ट इवेंट के दौरान एसपी मुखर्जी तैराकी परिसर में निर्माण संबंधी कुछ कमियाँ रह गई थीं लेकिन छह फुट और तीन इंच लंबे इस तैराक को उम्मीद है कि खेलों की शुरुआत होने से पहले यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।

खाड़े ने कहा कि टेस्ट इवेंट के समय इसमें (एसपी मुखर्जी तैराकी परिसर) कुछ कमियाँ थीं लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि खलों से पहले इन्हें दूर कर लिया जाएगा। वर्ष 2008 में खाड़े सबसे कम उम्र में ओलिम्पिक (बीजिंग) में क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय तैराक बने थे।
पिछले कुछ समय से भारतीय तैराकों के पास विदेशी कोच नहीं है। यह पूछने पर कि क्या उन्हें विदेशी कोच की कमी खलती है? खाड़े ने कहा कि हम अपने कोच (निहार अमीन) और वर्तमान सुविधाओं से खुश हैं। हमारे कोच विश्व की प्रमुख कोचों में से एक हैं, इसलिए मुझे लगता है कि हमें विदेशी कोच की कोई जरूरत नहीं है। खाड़े और संदीप सेजवाल सहित पाँच भारतीय तैराक इस साल दो महीने यूरोप में प्रशिक्षण लेकर आए हैं। (भाषा)



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