हिन्दू मंदिर में जाने के नियम, जानिए

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
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सभी धर्मों के अपने-अपने प्रार्थनाघर होते हैं। उन प्रार्थना स्थलों में जाने का वार और समय नियुक्त है। बौद्ध विहार, सिनेगॉग, चर्च, मस्जिद और गुरुद्वारे में प्रार्थना करने के लिए निश्‍चित वार और समय नियुक्त है, क्या उसी तरह हिन्दू मंदिर में भी निश्चित वार और समय नियुक्त हैं? इसके अलावा क्या है हिन्दू मंदिरों में जाने के नियम और क्या है मंदिर का विज्ञान।
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'मंदिर' का अर्थ होता है- मन से दूर कोई स्थान। 'मंदिर' का शाब्दिक अर्थ 'घर' है और मंदिर को द्वार भी कहते हैं, जैसे रामद्वारा, गुरुद्वारा आदि। मंदिर को आलय भी कह सकते हैं, ‍जैसे ‍कि शिवालय, जिनालय। लेकिन जब हम कहते हैं कि मन से दूर जो है, वह मंदिर है तो उसके मायने बदल जाते हैं। मंदिर को अंग्रेजी में भी 'मंदिर' ही कहते हैं 'टेम्पल' (Temple) नहीं। जो लोग 'टेम्पल' कहते हैं, वे मंदिर के विरोधी हो सकते हैं।

प्राचीन मंदिर ऊर्जा और प्रार्थना के केंद्र थे, लेकिन आजकल के मंदिर तो पूजा-आरती के केंद्र हैं। बहुत से लोग मंदिर में वार्तालाप करते हैं, मोबाइल अटेंड करते हैं और मोजे पहनकर ही चले जाते हैं। इसके अलावा भी ऐसी कई बातें हैं जो मंदिर नियमों के विरुद्ध है।


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