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Written By WD

हनुमानजी के प्रसिद्ध चमत्कारिक मंदिर, जानिए

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हनुमानजी के चमत्कारिक सिद्धपीठों की संख्‍या को लेकर मतभेद हैं। उन सभी स्थानों पर हनुमान के मंदिर बने हैं, जहां वे गए थे या जहां वे बहुत काल तक रहे थे या जहां उनका जन्म हुआ। कुछ मंदिर उनके जीवन की खास घटनाओं से जुड़े हैं और कुछ का संबंध चमत्कार से है। देश के दूरस्थ गांवों एवं कस्बों में भी ऐसे मंदिर स्थित हैं जिनके चमत्कार की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है।

इन हजारों सिद्धपीठों या मंदिरों में से 10 मंदिर को प्रमुख मानना बहुत ही मुश्किल है। फिर भी हमने प्रयास किया है। आप जानिए और हमें बताएं कि इन 10 के अलावा और कौन से खास मंदिर हैं जिनको टॉप 50 की लिस्ट में शामिल किया जाए।

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हनुमानजी एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके कारण तीनों लोकों की कोई भी शक्ति अपनी मनमानी नहीं कर सकती। वे साधु-संतों के अलावा भगवानों के भी रक्षक हैं। उनसे बड़ा इस ब्रह्मांड में दूसरा न कभी कोई हुआ है, न है और न होगा। वे परम ब्रह्मचारी और ईश्वरतुल्य हैं। वे ही परमेश्वर हैं।

 

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अंजनी पर्वत : कुछ विद्वान मानते हैं कि नवसारी (गुजरात) स्थित डांग जिला पूर्व काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। इस दंडकारण्य में राम ने अपने जीवन के 10 वर्ष गुजारे थे।

डांग जिला आदिवासियों का क्षेत्र है। डांग जिले के सुबीर के पास भगवान राम और लक्ष्मण को शबरी माता ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरी धाम नाम से जाना जाता है। शबरी धाम से लगभग 7 किमी की दूरी पर पूर्णा नदी पर स्थित पंपा सरोवर है। यहीं मातंग ऋषि का आश्रम था। डांग जिले के आदिवासियों की सबसे प्रबल मान्यता यह भी है कि डांग जिले के अंजना पर्वत में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था।

कुछ लोग मानते हैं कि हनुमानजी का जन्म झारखंड राज्य के उग्रवाद प्रभावित क्षे‍त्र गुमला जिला मुख्‍यालय से 20 किलोमीटर दूर आंजन गांव की एक गुफा में हुआ था। इसी जिले के पालकोट प्रखंड में बाली और सुग्रीव का राज्य था। माना यह भी जाता है कि यहीं पर शबरी का आश्रम था। यह क्षेत्र भी रामायण काल में दंडकारण्य क्षेत्र का हिस्सा था। यहीं पर पंपा सरोवर है, जहां राम और लक्ष्मण ने रुककर जल ग्रहण किया था।

जंगल और पहाड़ों से घिरे इस आंजन गांव में एक अतिप्राचीन गुफा है। यह गुफा पहाड़ की चोटी पर स्थित है। माना जाता है कि यहीं पर माता अंजना और पिता केसरी रहते थे। यहीं पर हनुमानजी का जन्म हुआ था। गुफा का द्वार बड़े पत्थरों से बंद है लेकिन छोटे छिद्र से आदिवासी लोग उस स्थान के दर्शन करते हैं और अक्षत व पुष्प चढ़ाते हैं। लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि यह स्थान माता अंजना के जन्म से जुड़ा है।

एक जनश्रुति के अनुसार आदिवासियों को इस बात का भान नहीं था कि हनुमानजी और उनके माता-पिता पवित्रता और धर्म के पालन करने वालों के प्रति प्रसन्न रहते हैं। आदिवासियों ने माता अंजना को प्रसन्न करने के लिए एक दिन उनकी गुफा के समक्ष बकरे की बलि दे दी। इससे माता अप्रसन्न हो गईं और उन्होंने एक विशालकाय पत्थर से हमेशा-हमेशा के लिए गुफा का द्वार बंद कर दिया। अब जो भी इस गुफा के द्वार को खोलने का प्रयास करेगा उसके ऊपर विपत्ति आएगी।

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कैथल मंदिर : कैथल हरियाणा प्रांत का एक शहर है। इसकी सीमाएं करनाल, कुरुक्षेत्र, जीन्द, और पंजाब के पटियाला जिले से मिली हुई हैं। इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान भी माना जाता है। इसका प्राचीन नाम था कपिस्थल। कपिस्थल कुरु साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था। आधुनिक कैथल पहले करनाल जिले का भाग था।

पुराणों के अनुसार इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है। कपि के राजा होने के कारण हनुमानजी के पिता को कपिराज कहा जाता था। कैथल में पर्यटक ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़े अवशेष भी देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर हनुमानजी की माता अंजनी का एक प्राचीन मंदिर भी और अजान किला भी।

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हनुमानगढ़ी : अयोध्या में स्थित यह सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। यह मंदिर अयोध्या में सरयू नदी के दाहिने तट पर एक ऊंचे टीले पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए 76 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। यहां पर स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा केवल छः (6) इंच लंबी है, जो हमेशा फूल-मालाओं से सुशोभित रहती है।

इस मंदिर के जीर्णोद्धार के पीछे एक कहानी है। सुल्तान मंसूर अली लखनऊ और फैजाबाद का प्रशासक था। तब एक बार सुल्तान का एकमात्र पुत्र बीमार पड़ा। वैद्य और डॉक्टरों ने जब हाथ टेक दिए, तब सुल्तान ने थक-हारकर आंजनेय के चरणों में अपना माथा रख दिया। लेकिन मुसलमान होने के नाते किसी मूर्ति के समक्ष झुकने से उसे ग्लानि हो रही थी। लेकिन मन में श्रद्धा थी और उसने सोचा कि खुदा और ईश्वर में कोई फर्क नहीं। उसने हनुमान से विनती की और तभी चमत्कार हुआ कि उसका पुत्र पूर्ण स्वस्थ हो गया। उसकी धड़कनें फिर से सामान्य हो गईं।

तब सुल्तान से खुश होकर अपनी आस्था और श्रद्धा को मूर्तरूप दिया- हनुमानगढ और इमली वन के माध्यम से। उसने इस जीर्ण-शीर्ण मंदिर को विराट रूप दिया और 52 बीघा भूमि हनुमानगढ़ी और इमली वन के लिए उपलब्ध करवाई। संत अभयारामदास के सहयोग और निर्देशन में यह विशाल निर्माण संपन्न हुआ। संत अभयारामदास निर्वाणी अखाड़ा के शिष्य थे और यहां उन्होंने अपने संप्रदाय का अखाड़ा भी स्थापित किया था।

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बालाजी हनुमान मंदिर : राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ घाटा मेहंदीपुर नामक स्थान है, जहां पर बहुत बड़ी चट्टान में हनुमानजी की आकृति स्वत: ही उभर आई है जिसे श्रीबालाजी महाराज कहते हैं। इसे हनुमानजी का बाल स्वरूप माना जाता है। इनके चरणों में छोटी-सी कुंडी है जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता।

यहां के हनुमानजी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है तथा इसी वजह से यह स्थान न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में विख्यात है। यहां हनुमानजी के साथ ही शिवजी और भैरवजी की भी पूजा की जाती है।

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हनुमान मंदिर- सरिस्का राष्ट्रीय पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार से 11 किमी की दूरी पर स्थित हनुमान मंदिर अलवर आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है। मंदिर में विश्राम करते हनुमान की आकर्षक प्रतिमा महाभारत काल की याद दिलाती है। कहा जाता है कि मंदिर उसी स्थान पर बना है, जहां हनुमान ने आराम किया था।

जगन्नाथ का मंदिर : जगन्नाथपुरी में ही सागर तट पर बेदी हनुमान का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। कहावत है कि महाप्रभु जगन्नाथ में वीर मारुति को यहां समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया था, परंतु जब-तब हनुमान भी जगन्नाथ-बलभद्र एवं सुभद्रा के दर्शनों का लोभ संवरण नहीं कर पाते थे, सम्प्रति समुद्र भी उनके पीछे नगर में प्रवेश कर जाता। केसरीनंदन की इस आदत से परेशान हो जगन्नाथ महाप्रभु ने हनुमान को यहां स्वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर दिया।

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संकटमोचन हनुमान मंदिर : भूतभावन आशुतोष की पावन नगरी बनारस में अवस्थित है संकटमोचन हनुमान मंदिर। इस पावन नगरी में जिस स्थान पर गोस्वामी तुलसीदास को अंजनीसुत ने दर्शन दिए, वही स्थान आज संकटमोचन के नाम से सुविख्यात है। जिस मुद्रा में गोस्वामी को दर्शन हुए, उसी की प्रतिकृति है यहां का विग्रह। स्वयं तुलसीदासजी ने यह मूर्ति स्थापित करवाई थी। इस मंदिर के प्रांगण में हनुमत विग्रह के सामने ही सानुज श्रीराम, माता जानकी के साथ विराजित हैं।

काशी से ही जिस गुफानुमा कोठरी में गोस्वामी ने साधनारत अपने जीवन का अंतिम समय गुजारा वहां भी 'गुफा के हनुमान' के रूप में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है।

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श्रीपंचमुख आंजनेय स्वामीजी : तमिलनाडु के कुंभकोणम नामक स्थान पर श्रीपंचमुखी आंजनेयर स्वामीजी (श्रीहनुमानजी) का बहुत ही मनभावन मठ है। यहां पर श्रीहनुमानजी का पंचमुख रूप में विग्रह स्थापित है, जो अत्यंत भव्य एवं दर्शनीय है।

यहां पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्रीरामजी को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था, तब प्रभु श्रीराम को ढूंढने के लिए हनुमानजी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारंभ की थी और फिर इसी रूप में उन्होंने उन अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था। यहां पर हनुमानजी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सारे दुखों, संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है।

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गंधमाधन पर्वत : कन्याकुमारी से 4 कोस पूर्व में शुचीन्द्रम नामक स्थान पर महावीर हनुमान की लगभग 13-14 हाथ ऊंची कनक भूघटाकार-सिंहासनासीन मूर्ति स्थापित है, जो संपूर्ण भारतवर्ष में अद्वितीय है।

* यहां समीप ही गंधमाधन पर्वत है। स्थानीय मान्यता अनुसार यहां केसरीनंदन का जन्म हुआ था। इसी पर्वत पर हनुमत्कुंड नामक तीर्थ स्थान है। कहा जाता है कि लंका विजय के पश्चात प्रभु श्रीराम ने इस स्थान पर स्नान कर विश्राम किया था। माना जाता है कि इस कुंड का निर्माण स्वयं रामदूत ने ही किया था। वर्षों से यह विश्वास फलता आया है कि बंध्या साध्वियां यहां स्नान कर पुत्रवती बनती हैं।

* कन्याकुमारी से तिरुवनंतपुरम के रास्ते पर सड़क किनारे एक छोटी-सी पहाड़ी है जिसका नाम है मारूत मलै। माना जाता है कि यह उसी द्रोण गिरि का अंश है, जो वीर बजरंग श्री लक्ष्मण के शक्तिपीड़ित होने पर लाए थे। द्रोणगिरि का एक टुकड़ा यहां टूटकर गिरा। इस पहाड़ी (तमिल में मलै) पर प्राणदायिनी जड़ी-बूटियां भरी हुई हैं।

* दक्षिण में भगवान वेंकटेश के वास तिरुमाला की ओर जाने वाले राजमार्ग पर समर्थ स्वामी रामदास द्वारा स्थापित एक अत्यंत जागृत विग्रह स्थित है।

* तमिलनाडु के शोलम मंडल में नामक्कल नामक स्थान पर शंकर सुवन की लगभग 8 हाथ ऊंची भव्य मूर्ति स्थापित है।

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पूर्वोत्तर के मंदिर : मणिपुर प्रदेश में महाबली आश्रम स्थित है। यहां वीर हनुमान का एक अतिप्राचीन स्थान है। प्राकृतिक सुंदरता को समेटे यह स्थान वानरी सेना से भी परिपूर्ण है। माना जाता है कि अंजनीसुत स्वयं यहां आते रहते हैं।

* नगालैंड के चूंगा जान में प्रसिद्ध हनुमत- सेवक शंकरदास त्यागी की उपासना स्थली के रूप में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, जहां भक्तों को अपार शांति की अनुभूति होती है।

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अलीगंज का हनुमान मंदिर : लखनऊ को किसी समय लक्ष्मणपुर कहा जाता था। लखनऊ के अलीगंज में है एक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है, जो बेहद ही चमत्कारिक मंदिर है। आसपास या दूरदराज में जहां भी हनुमान मंदिर बनाया जा रहा है उसके लिए यहीं से सिंदूर और लंगोट ले जाकर प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को यहां विशाल मेला लगता है।

अंग्रेज काल में लखनऊ के नवाब मुहम्मद अली शाह रहते थे। उनकी बेगम राबिया को कोई औलाद नहीं हो रही थी। सब दवा-दुआ बेकार जा रहा थी। किसी ने बताया कि इस्लामबाड़ी में एक हिन्दू संत रहता है, उसके सामने झोली फैलाओ।

इस्लामबाड़ी को पहले हनुमानबाड़ी कहते थे। यहां हनुमान मंदिर था लेकिन 600 वर्ष पूर्व बख्तियार खिलजी ने इसका नाम बदलकर इस्लामबाड़ी कर दिया। खैर, इस्लामबाड़ी में इस हिन्दू संत को बाड़ी वाले बाबा कहकर पुकारते थे। ये बजरंग बली के परम भक्त थे।

राबिया बेगम ने बाड़ी वाले बाबा के सामने दामन फैलाया तो बाबा ने बेगम की फरियाद पहुंचा दी रामदूत हनुमान के पास तक। हनुमानजी ने बेगम की आस्था को जांचने की सोची और स्वप्न में बेगम को आदेश दिया- इस्लामबाड़ी के टीले के नीचे मेरी मूर्ति दबी पड़ी है, उसका उद्धार कर किसी मंदिर में स्थापित करो।

सुबह राबिया बेगम बाबा के पास गई और बताया कि हनुमानजी स्वप्न में आए थे। बाबा के निर्देशन में टीले की खुदाई हुई और दबी हुई मूर्ति को निकाला गया। वही मूर्ति आज अलीगंज के मंदिर में स्थापित है। बेगम ने यहां बाबा का मंदिर बनवाया और बेगम को संतान सुख प्राप्त हुआ।

अंत में अन्य प्रसिद्ध मंदिर...


* जम्मू स्थित प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर वीर आंजनेय का विशाल विग्रह अवस्थित है। मंदिर के अंदर भी हनुमानजी की मूर्ति प्रतिष्ठापित है।

* खंडवा और इंदौर के मध्य नर्मदा तट पर स्थित ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के पास पर्वत श्रृंखला पर अवस्थित अनेक शिवलिंगों के मध्य वीर बजरंग बली का एक चित्ताकर्षक विग्रह स्थापित है।

* महाराष्ट्र के पूना जिले में प्रसिद्ध अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर के पास से एक पतली पगडंडी उतरकर वन में जाती है। विशाल वृक्षों की शाखाओं-प्रशाखाओं की छांव में प्राकृतिक सुषमा यहां अनुपम छटा बिखेरती है। यहां अत्यंत प्राचीन एवं अनुपम हनुमत विग्रह स्थापित है।

* मध्यप्रदेश की उज्जयनी नगरी के शिप्रा नदी के दोनों तटों पर रणजीत और गिरनारी हनुमान के नाम से सुविख्यात 2 हनुमान मंदिर हैं। पौष मास की अष्टमी को शिप्रा के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों पर स्थित इन पावन देवालयों से शोभायात्रा (सवारी) निकाली जाती है।

* उज्जैन में ही पंचमुखी हनुमान का भव्य एवं प्राचीन मंदिर स्थित है। राजपुताने में बालाजी के नाम से पूजित वीर बजरंगी के विश्वप्रसिद्ध देवालयों में एक है घाटा मेहंदीपुर। भूत-प्रेत बाधा, पक्षाघात आदि रोगों से मुक्ति हेतु हजारों भक्त प्रतिदिन यहां आते हैं।

* हाड़ौती की संस्कारधानी कोटा के पास अमर निवास का गोदावरी धाम भी हनुमान भक्तों की आस्था का जीवंत केंद्र है। चंबल नदी के गर्भ से प्राप्त विग्रह यहां स्थापित है। यह स्थान भी भूत-प्रेत पीड़ित, विक्षिप्त, अर्धविक्षिप्त रोगियों को लाभ देने के लिए प्रसिद्ध है।

* शेखावाटी अंचल में भक्त मोहनदास की साधना स्थली के रूप में प्रसिद्ध सालासर धाम की कोटि-कोटि भक्तों की आस्था का केंद्र है। श्मन्श्रु (दाढ़ी-मूंछ) युक्त आंजनेय विग्रह बड़ा ही प्रभावशाली एवं भव्य है। भक्त मोहनदास के समय से ही यहां अखंड ज्योत प्रज्वलित है।

* मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध नाथद्वारा धाम में नगर के अंदर तथा बाहर चारों दिशाओं में वीर पवनपुत्र प्रहरी के रूप में विराजमान हैं। पूर्व, पश्चिम, दक्षिण एवं उत्तर में यह विग्रह क्रमशः सिंहाड के हनुमान, बाखर के हनुमान, छावनी के हनुमान एवं व्यंकट हनुमान के नाम से विख्यात हैं।

* उत्कल प्रदेश स्थित पुरी धाम में जगन्नाथ मंदिर के चारों कोनों पर अंजनी सुत फत्ते हनुमान (पूर्व), बरी हनुमान (पश्चिम), बाराभाई हनुमान (दक्षिण) एवं तपस्वी हनुमान (उत्तर) के नाम से अवस्थित है।

* बंग देश बंगाल की राजधानी कोलकाता के हरिसन मार्ग पर एक गली, जिसे हनुमान गली के नाम से जाना जाता है, में हनुमानजी का अतिप्राचीन मंदिर है। कहा जाता है संपूर्ण बंगाल में वीर बजरंग का यह प्राचीनतम विग्रह है।

* मुंबई महानगर में प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर के पार्श्व में रामदूत हनुमान का प्रसिद्ध मंदिर है। मुंबई में ही मलाड़ उपनगर में शांताराम सरोवर के समीप हनुमान टेकरी के नाम से विख्यात हनुमान मंदिर है। यह स्थान साधु सेवा एवं अन्नक्षेत्र हेतु भी प्रसिद्ध है। दादर-वडाला बस स्टैंड के पास स्थित अलबेला हनुमान मंदिर में हिन्दू, मुस्लिम, पारसी, सिख, ईसाई सभी धर्मों के लोग समान भाव से हनुमान के दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ करते हैं।

* नासिक के पंचवटी में भूमिगत सुरंग में राम-जानकी के विग्रहों के समक्ष वीर बजरंग का विशाल विग्रह भक्तों की आस्था का केंद्र है।

* बिहार का सहस्राराम (बौद्धों के हजारों आराम विहार), जो अब सासाराम के नाम से प्रसिद्ध है, इसी सासाराम को आरा से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर पर्याप्त ऊंचाई पर स्थित है कुराइच के महावीर। ब्रिटिश सेना की छावनी यहां समीपस्थ गढ़ नोखा में थी और अंग्रेज हनुमान को 'मंकी गॉड' के नाम से पुकारकर उपहास उड़ाते थे। वज्रांगबली ने अपना करिश्मा दिखाया तो पूरी छावनी नतमस्तक हो गई कुराइच के महावीर के समक्ष।

* बिहार के ही दरभंगा जिले के राज क्षेत्र में अवस्थित वीर हनुमान का एक छोटा-सा मंदिर है। श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर जयपुर से पूरा का पूरा लाकर यहां स्थापित कर दिया गया था।

* सालासर हनुमान मंदिर : राजस्थान के चुरू जिले में सालासर नामक गांव में स्थित हनुमान प्रतिमा में हनुमानजी की दाढ़ी-मूछें भी हैं। इसके संस्थापक मोहनदासजी बचपन से श्री हनुमानजी के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे। माना जाता है कि हनुमानजी की यह प्रतिमा एक किसान को हल चलाते हुए मिली थी जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया है। यहां हर साल भाद्रपद, आश्विन, चैत्र एवं बैसाख की पूर्णिमा के दिन विशाल मेला लगता है।

* हनुमानधारा : चित्रकूट के समीप सीतापुर से 3 मील तथा कोटितीर्थ से 2 मील की दूरी पर हनुमानधारा नामक स्थान है। यहां पर पास ही के पहाड़ के सहारे हनुमानजी की प्रतिमा टिकी हुई है। पास ही में स्थित कुंड की बहती जलधारा लगातार इस प्रतिमा को स्पर्श करती है इसलिए इस जगह का नाम हनुमानधारा पड़ा है। यह अत्यंत मनोहर एवं रमणीय स्थान है।

* नई दिल्ली का प्राचीन हनुमान मंदिर : यहां महाभारतकालीन श्री हनुमानजी का एक प्राचीन मंदिर है। यहां पर उपस्थित हनुमानजी स्वयंभू हैं। बालचंद्र अंकित शिखर वाला यह मंदिर आस्था का महान केंद्र है।

* कष्टभंजन हनुमान मंदिर : इस मंदिर में हनुमानजी का कष्टभंजन रूप में विग्रह स्थापित है। यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय का एकमात्र हनुमान मंदिर है।

* जामनगर हनुमान मंदिर : सन् 1540 में जामनगर की स्थापना के साथ ही स्थापित यह हनुमान मंदिर गुजरात के गौरव का प्रतीक है। यहां पर सन् 1964 से 'श्री राम धुन' का जाप लगातार चलता आ रहा है जिस कारण इस मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

* महावीर हनुमान मंदिर : पटना जंक्शन के ठीक सामने महावीर मंदिर के नाम से श्री हनुमानजी का मंदिर है। उत्तर भारत में मां वैष्णोदेवी मंदिर के बाद यहां ही सबसे ज्यादा चढ़ावा आता है। इस मंदिर को प्रतिदिन लगभग 1 लाख रुपए की आय होती है। यहां श्री हनुमानजी संकटमोचन रूप में विराजमान हैं।

* लेटे हुए हनुमान : इलाहाबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमानजी की प्रतिमा वाला एक छोटा किंतु प्राचीन मंदिर है। यह संपूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमानजी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा 20 फुट लंबी है।

* कैंप हनुमानजी मंदिर : अहमदाबाद की छावनी परिसर में कैंप हनुमान मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर है। इसे भारत के प्रमुख हनुमान मंदिरों में माना जाता है।