...जहां बरसते हैं कोड़े

होली पर एक अनूठी परंपरा

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के समीपस्थ ग्राम बनगंवा में कई पीढ़ियों से एक अनूठी परंपरा चली आ रही है। जिसमें 25 फीट ऊपर खंबे पर बकरे को बांधकर 144 बार गोल घुमाया जाता है। इसके बाद ग्रामीण ही दोनों ओर निकली रस्सी पर दाएं-बाएं झूला झूलते हैं। फिर इन व्यक्तियों पर कोड़ा बरसाया जाता है। यह अनूठी परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

धुलेंड़ी (होली) की शाम पांच बजे से की विशेष पूजा-अर्चना प्रत्येक वर्ष धुलेंड़ी के दिन ही की जाती है। इस पूजा-अर्चना में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण तो पहुंचते ही है और साथ-साथ अन्य जगहों से भी सैकड़ों लोग इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए आते है। इसी दिन बच्चों का मुंड़न भी किया जाता है।
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इस विशेष पूजा में महिलाएं भी सैकड़ों की संख्या में उपस्थित होती है। गांव के सरपंच मुन्नुलाल गौर ने बताया कि गांव में यह परंपरा हमारे पूर्वजों से चली आ रही है।

इसी परंपरा के अनुसार प्रति वर्ष पड़वा पर ही यहां पर मेला भरता है और बाबा वीर बम्मोल की पूजा अर्चना की जाती है। वहीं गांव के निवासी शंकर ने बताया कि यह परंपरा हजारों साल से चल रही है। यह देवता है जिनकी हम पूजा-अर्चना करते हैं।


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